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पितृ पक्ष में पीपल के 21 पत्तों का 'राम नाम' उपाय: जानिए हनुमान जी और शनि देव से जुड़ी यह खास मान्यता

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:00 AM (IST)

पितृ पक्ष में पूर्वजों की शांति और कृतज्ञता के लिए पीपल के पेड़ से जुड़े अनुष्ठान महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में 21 पीपल के पत्तों का प्रसाद (Picture Credits- AI Images)

पितृ पक्ष में 21 पीपल के पत्तों का प्रसाद (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष के दौरान कई हिंदू परिवार प्रार्थना, श्राद्ध, तर्पण और स्मरण के माध्यम से अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इस अवधि से जुड़ी कई पारंपरिक प्रथाएं हैं, जिनमें पीपल के पेड़ से जुड़ा अनुष्ठान काफी लोकप्रिय माना जाता है।

एक पारंपरिक प्रथा में 21 पीपल के पत्तों पर श्रीराम लिखकर उन्हें हनुमान जी को प्रसाद के रूप में तैयार करना और पवित्र पेड़ के पास प्रार्थना करते वक्त अपने पूर्वजों को याद करना है।

पितृ पक्ष में पीपल का पेड़ क्यों महत्वपूर्ण है?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में पीपल के पेड़ को सम्मानति स्थान हासिल है। पितृ पक्ष के दौरान कई हिंदू परिवारों में अपने पूर्वजों को समर्पित अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसका उद्देश्य कृतज्ञता प्रकट करने के साथ दिवंगत आत्मा को शांति देना है। पीपल के पेड़ के बारे में पारंपरिक मान्यताएं विभिन्न समुदायों में अलग-अलग हो सकती है।

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21 पत्तों का हनुमान अनुष्ठान

कई प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक, भक्त पितृ पक्ष के दौरान पीपल के 21 पत्ते लेते हैं और प्रत्येक पत्ते पर 'श्रीराम' लिखते हैं। फिर इन पत्तों के माला बनाकर हनुमान जी को पूरी श्रद्धा और प्रार्थना के साथ अर्पित करते हैं। 21 की संख्या और भगवान राम के नाम का जाप इस विधि को बेहद प्रभावी और भक्ति से भर देता है।

मंगलवार या शनिवार चुनें

पितृ पक्ष के दौरान यह उपाय पारंपरिक रूप से मंगलवार या शनिवार के दिन करना बेहद शुभ माना जाता है। ये दिन हनुमान जी की पूजा के लिए समर्पित हैं। भक्त श्रीराम के नाम के साथ पीपल के पत्ते तैयार कर सकते हैं और उन्हें सच्ची प्रार्थना के साथ हनुमान जी को अर्पण कर सकते हैं।

शनि देव से जुड़ी कई परंपराओं में भी शनिवार का महत्व है, इसलिए कुछ भक्त पीपल की पूजा को शांति और सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं। हालांकि अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग रिवाज माने जाते हैं, इसलिए सही तरीका आपके परिवार की परंपराओं के हिसाब से अलग देखने को मिल सकता है।

जड़ में जल चढ़ाएं

पीपल के पेड़ की पारंपरिक पूजा का अहम हिस्सा है उसकी जड़ों में पानी देना। शनिवार या मंगलवार को भक्त पेड़ के नीचे पानी डाल सकते हैं, दीया जला सकते हैं और कुछ पल शांति के साथ प्रार्थना कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में पीपल के पेड़ के पास दीया जलाना पूर्वजों से जोड़कर देखा जाता है।

इसके अलावा पीपल पेड़ के चारों ओर सात चक्कर या परिक्रमा लगाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। चक्कर लगाते समय वे मन ही मन अपने पूर्वजों को याद कर सकते हैं और “ऊं पितृदेवाय नमः” का जाप कर सकते हैं। इस उपाय को जल्दबाजी की बजाय पूरी एकाग्रता के साथ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।