यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हल्द्वानी में रेलवे भूमि के अतिक्रमणकारियों को फिलहाल राहत नहीं, 15 जून को अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर दायर याचिका तथा अतिक्रमणकारियों की ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नैनीताल : हाई कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर दायर याचिका तथा अतिक्रमणकारियों की तरफ से दायर याचिकाओं व विशेष अपील पर एक साथ सुनवाई की।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने फिलहाल अतिक्रमणकारियों को कोई अंतरिम राहत नहीं देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 15 जून नियत की है। आरटीआई कार्यकर्ता रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर फैसला दूसरी खंडपीठ सुरक्षित रखा है, जिसमें आदेश आना है, इसलिए इससे संबंधित अन्य मामलों की सुनवाई अभी संभव नहीं है।
उच्च न्यायालय ने नौ नवंबर 2016 को हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सप्ताह के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। कोर्ट ने कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी हैं, उनको रेलवे पीपीएक्ट के तहत नोटिस देकर जनसुनवाई करें।
रेलवे की तरफ से कहा गया कि हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, जिसमें करीब 4365 लोग मौजूद हैं हाई कोर्ट के आदेश पर इनको पीपीएक्ट में नोटिस दिया गया, रेलवे ने पूरी सुनवाई कर ली है। रेलवे कोर्ट में किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नहीं पाए गए। इनको हटाने के लिए रेलवे ने जिलाधिकारी नैनीताल से दो बार सुरक्षा दिलाए जाने हेतु पत्र दिया गया।
डीएम की ओर से जवाब नहीं दिया गया जबकि दिसम्बर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यो को दिशा निर्देश दिए थे कि अगर रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो पटरी के आसपास रहने वाले लोगो को दो सप्ताह और उसके बाहर रहने वाले लोगोंं को छह सप्ताह के भीतर नोटिस देकर हटाएं ताकि रेवले का विस्तार हो सके, अगर इनके सभी पेपर वैध पाए जाए हैं, तो राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इनको आवास मुहैया कराएं।
