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    नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव: CCTV से निगरानी, स्लॉटर हाउस में होगी पशुबलि... सजा मां नंदा-सुनंदा का दरबार

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 10:33 AM (IST)

    नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रीराम सेवक सभा द्वारा आयोजित इस महोत्सव में मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की स्थापना की गई। मूर्तियों को भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है और शहर में भारी भीड़ उमड़ रही है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पशुबलि पर प्रतिबंध है।

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    नैनीताल में सज गया मां नंदा सुनंदा का भव्य दरबार। फोटो सौजन्य मोहित लाल साह।

    जागरण संवाददाता, नैनीताल। श्रीराम सेवक सभा की ओर से आयोजित नंदा देवी महोत्सव में मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण पूरा हो चुका है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मूर्तियों को मां नयना देवी परिसर में बने भव्य मंडप में प्रतिष्ठापित किया जाएगा। ब्रह्म मुहूर्त में विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद मूर्तियों को आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रख दिया जाएगा। मां के दर्शनों के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।

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    शनिवार को सेवा समिति हाल में मूर्ति निर्माण समिति के संयोजक चंद्रप्रकाश साह के संयोजकत्व में कदली के तनों, रूई, कपड़े से मूर्तियों का निर्माण किया गया। इसमें हीरा रावत, गोधन सिंह, हरीश पंत, गोविंद सिंह, अमर साह, सागर सोनकर, आनंद बिष्ट ने सहयोग प्रदान किया जबकि मूर्तियों को मोनिका साह, आरती सम्मल, मेघा बिष्ट, सेंट जोजफ कालेज के छात्र हिमांशु गुप्ता ने मूर्तियों को आकृति देने के साथ ही रंग चढ़ाया।

    ऐसे तैयार होती हैं मूर्तियां

    नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव का आयोजन 1902 में शुरू हुआ था, अल्मोड़ा से आए मोतीराम साह ने इसकी शुरुआत की थी। 1926 से श्रीराम सेवक सभा की ओर से यह आयोजन किया जा रहा है। नंदा देवी उत्तराखंड की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है, इसलिए भक्तजन अपनी देवी की उपासना का मौका गंवाते नहीं हैं। नैनीताल में मूर्तिकार स्व. ठाकुर दास साह का परिवार ही मूर्तियां बनाता है।

    आकार देने के बाद मूर्ति को जेवर पहनाए जाते हैं

    पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी मंटू बताते हैं कि मूर्ति के लिए पांच फिट का केले के पेड़ या कदली का तना काटकर उसमें खपच्चियों से चेहरे का आकार दिया जाता है। आंख, कान व नाक बनाने के लिए बड़े बटन लगाए जाते हैं। सांचे को दबाने के लिए रूई का उपयोग किया जाता है। तीन मीटर सूती का कपड़ा पीले रंग में रंगा जाता है, आकार देने के बाद मूर्ति को जेवर पहनाए जाते हैं।

    कदली जल में घुलनशील है, इसलिए समापन पर मूर्तियों का विसर्जन झील पर किया जाता है। मूर्ति निर्माण में धार्मिक व तकनीकी पक्षों का विशेष ध्यान दिया जाता है। जोशी के अनुसार 1955-56 तक चांदी की मूर्तियों का निर्माण किए जाने का भी इतिहास रहा है।

    स्लाटर हाउस में ही होगी पशुबलि

    नंदा देवी महोत्सव में हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मंदिर परिसर में पशुबलि पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी और पिछली बार की तरह पूजा के लिए लाए जाने वाले बकरों को पुलिस सुरक्षा में मंदिर तक ले जाया जाएगा, फिर लौटाया जाएगा। बकरों के पंजीकरण की भी व्यवस्था की गई है। एसडीएम नवाजिश खलिक ने बताया कि हरिनगर में पशुबलि के लिए स्लाटर हाउस तैयार किया गया है। पीसीबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी आ चुका है।

    40 सीसीटीवी से नंदा देवी मेला क्षेत्र की निगरानी

    नंदा देवी महोत्सव में कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने को सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है। परिसर में 40 कैमरे स्थापित किये गए है। बीते दिनों मल्लीताल क्षेत्र में अग्निकांड होने के बाद आग की रोकथाम को पर्याप्त इंतजाम किये गए है। पांच सितंबर तक नंदा देवी महोत्सव का आयोजन हो रहा है। महोत्सव को लेकर फ्लैट्स मैदान पर दुकानें सज चुकी है।

    लोगों की बढ़ती भीड़ काे देखते हुए पुलिस ने भी खास इंतजाम किए हैं। मेला क्षेत्र कंट्रोल रूम स्थापित किया जा चुका है। मेला परिसर में 40 कैमरे स्थापित कर संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर पुलिस कंट्रोल रूम से ही नजर रखी जा रही है। साथ ही ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।

    एसपी जगदीश चंद्रा ने बताया कि अग्निकांड जैसी किसी अनहोनी के लिए पूरी तैयारी है। मेला परिसर में में दमकल वाहन के साथ ही अन्य व्यवस्था की गई है। दुकानों के बाहर ठेकेदार व दुकानदारों की ओर से भी अग्निशमन उपकरण स्थापित किये गए है।