विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यहां शिव का रुद्राभिषेक करने से होती है मनोकामनाएं पूरी

By Sunil NegiEdited By:
Published: Sun, 05 Aug 2018 12:46 PM (IST)Updated: Sun, 05 Aug 2018 08:59 PM (IST)

हल्‍द्वानी के राजेंद्र नगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर है। मान्यता है कि मंदिर में शिव का रुद्राभिषेक करने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

यहां शिव का रुद्राभिषेक करने से होती है मनोकामनाएं पूरी
यहां शिव का रुद्राभिषेक करने से होती है मनोकामनाएं पूरी

हल्द्वानी, [जेएनएन]: भगवान भोलेनाथ के प्रति गहरी श्रद्धा रखने वाले भक्तों के लिए राजेंद्र नगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों से भी लोग शिव के दर्शन और पूजन करने के लिए आते हैं। सावन के महीने में कांवड़ हरिद्वार से गंगाजल लाकर मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि मंदिर में शिव का रुद्राभिषेक करने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इतिहास

राजेन्द्र नगर शिव मंदिर तकरीबन सत्तर साल पुराना है। जिसे शहर के पुराने शिवालयों में से एक माना जाता है। तब शहर में आबादी बहुत कम हुआ करती थी। आसपास के ज्यादातर लोग इसी स्थान पर शिव पूजन किया करते थे। धीरे-धीरे यह स्थान शिव पूजन का केंद्र बन गया। लोगों के सहयोग से समय-समय पर मंदिर में निर्माण कार्य कराए गए।

तैयारी

मंदिर में सालभर पूजन व यज्ञ अनुष्ठान संपन्न होते हैं। खासकर शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में लोग शिव का पूजन करने आते हैं। इसके अलावा यज्ञोपवित संस्कार संपन्न किए जाते हैं। शिव महापुराण और भागवत कथाओं का भी आयोजन होता है। सावन में प्रत्येक दिन भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और पूजन होता है, जबकि सोमवार को आसपास के लोग एकत्र होकर सामूहिक पूजन करते हैं।

यह सबसे पुराना शिवालय है।

अशोक पांडे (मुख्य पुजारी राजेन्द्र नगर शिव मंदिर) का कहना है कि यह सबसे पुराना शिवालय है। इसलिए आज भी बड़ी संख्या में लोग मंदिर में शिव पूजन के लिए आते हैं। इस बार भी मंदिर में विशेष पूजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: सिद्धेश्वर महादेव शिव मंदिर में है स्वयंभू शिवलिंग

यह भी पढ़ें: भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं चमनेश्वर महादेव

 यह भी पढ़ें: यहां भगवान शंकर ने पांडवों को भील के रूप में दिए थे दर्शन