गौरी शंकर पंत, चम्पावत । 118 वर्ष पूर्व लोहाघाट से नौ किमी दूर सघन वनों के बीच स्थित मायावती (स्थानीय भाषा में मैबट) नामक जगह पर स्वामी विवेकानंद के चरण स्पर्श से यह भूमि धन्य हो गई थी। स्वामी जी की कल्पना थी की हिमालय क्षेत्र में एक ऐसा स्थान हो जहां पर मठ स्थापित कर दुनिया में अद्वैत एवं वेदांत की रसधारा प्रवाहित की जाए। स्वामी जी काठगोदाम से प्रतिकूल मौसम का सामना करते हुए पैदल 3 जनवरी 1901 को मायावती आश्रम पहुंचे। यहां कुदरत का नजारा व प्राकृतिक सौंदर्य देखकर वह सारी थकान भूल गए। स्वामी जी की प्रेरणा से बना यह अद्भुत स्थान आज दुनिया भर के लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

स्वामी जी की इच्छा थी कि वह जीवन के अंतिम दिनों में इसी स्थान पर आकर विश्राम कर ध्यान मग्न हो जाए। यहां के वातावरण को देखकर स्वामी जी ने कहा था मुझे मेरी संकल्पना का स्थल मिल गया। स्वामी जी ने इसी स्थान पर कई दिनों तक विश्राम कर प्रकृति से सीधा साक्षात्कार किया। इस आश्रम की स्थापना स्वामी जी के शिष्य सेवियर दंपती द्वारा की गई थी। श्री कृष्ण मिशन की ओर से संचालित मठों में अद्वैत आश्रम मायावती एवं बैलूर मठ के समान दर्जा प्राप्त है। यहां किसी भी प्रकार की पूजा नहीं होती है। यहां मठ की और से नर सेवा को ही नारायण सेवा मानते हुए साल भर विशेष चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है। जिसमें देश-विदेश से पहुंचने वाले डॉक्टर लोगों को मुफ्त इलाज कर पुण्य लाभ कमाते है।

मायावती आश्रम चिकित्सा के लिए प्रसिद्ध : अद्वैत आश्रम मायावती की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों का चयन कर साल भर में एक निश्शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन कर दवा वितरित की जाती है।  साथ ही गरीबों को वस्त्र बांटने का कार्य किया जाता है। आश्रम में बने अस्पताल में बाहर से आने वाले चिकित्सकों द्वारा लगभग हर माह निश्शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन कर क्षेत्र के लोगों का उपचार किया जाता है। क्षेत्र के लोगों के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में आश्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। चिकित्सा के लिए क्षेत्र ही नही बल्कि में अन्य क्षेत्रों से भी लोग उपचार के लिए यहां लोग आते है। आश्रम से संचालित होने वाले कार्यक्रमों में अनुयायियों द्वारा बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया जाता है।

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Posted By: Skand Shukla

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