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    हल्‍द्वानी में ली है जमीन तो पढ़ें ये खबर, बढ़ते जा रहे धोखाधड़ी के मामले; कहीं आप भी न हो जाएं शिकार

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 07:06 PM (IST)

    हल्द्वानी और कुमाऊं क्षेत्र में जमीन धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। कमिश्नर कैंप कार्यालय में कई शिकायतें दर्ज हुईं। सितारगंज की एक महिला को 2014 में खरीदी जमीन पर कब्जा मिला। हिम्मतपुर तल्ला में भी कब्जे को लेकर विवाद सामने आया। कमिश्नर ने जमीन खरीदने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी है, जिसमें भूलेख पोर्टल से रिकॉर्ड मिलान और दस्तावेजों का सत्यापन शामिल है।

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    कमिश्नर की मदद से 11 साल बाद महिला को मिली सात बीघा जमीन. Concept Photo

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी से लेकर ऊधम सिंह नगर तक जमीन धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कमिश्नर के कैंप कार्यालय में सुनवाई के दौरान अलग-अलग जगहों से लोग फरियाद लेकर पहुंची थी। पिछली सुनवाई में एक महिला ने शिकायत करते हुए कहा था कि 2014 में उसने 27 लाख रुपये में सितारगंज में सात बीघा जमीन खरीदी थी। लेकिन कब्जा नहीं मिल रहा। रजिस्ट्री को लेकर भी दिक्कत पैदा की जा रही है। कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद अब महिला को न्याय मिल चुका है। सात बीघा भूमि की रजिस्ट्री भी उसके नाम हो गई।

    शनिवार को कैंप कार्यालय में सुनवाई के दौरान भूमि विवाद, पैसे हड़पने, अवैध निर्माण समेत अन्य मामलों को सुना गया। दो महिलाओं ने बताया कि हिम्मतपुर तल्ला में उन्होंने प्रापर्टी डीलर के माध्यम से जमीन ली थी। मगर कब्जा नहीं दिया जा रहा। कमिश्नर ने पटवारी को निर्देश दिए कि पैमाइश कर जल्द मामले को सुलझाना होगा।

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    पांच अन्य लोगों ने एक बिल्डर पर आरोप लगाते हुए कहा कि अनुबंध के तहत पानी, सडक और बिजली की सुविधा भी विकसित की जानी थी। कुछ लोगों को वास्तविक जमीन ही नहीं मिल रही। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अनुबंध में शामिली सभी सुविधाएं देने के निर्देश दिए गए। राजस्व विभाग की टीम को निरीक्षण के लिए कहा गया है। गौलापार व अन्य जगहों से भी भूमि संबंधी मामलों को लेकर लोग सुनवाई में पहुंचे थे।

    कमिश्नर बोले, जमीन खरीदने से पहलेे सावधानी जरूरी

    -भूमि के रिकार्ड का राजस्व विभाग के भूलेख पोर्टल से मिलान करना चाहिए।
    -खतौनी, खसरा, नक्शा व स्वामित्व अभिलेख का आधिकारिक सत्यापन जरूरी।
    -बयान या पूरी रकम देने से पहले असल विक्रेता व उसके कब्जे की पुष्टि जरूरी।
    -जमीन पर किसी तरह का विवाद तो नहीं। बैंक में लोन क ऐवज में बंधक तो नहीं।
    -डीलरों के चक्कर में पड़ने की बजाय खरीदारी से पहले दस्तावेज चेक करना जरूरी।