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    Winter 2025: पहले मानसून में बादलों ने बरपाया कहर, अब सर्दी भी ढाएगी सितम; होगी भारी बर्फबारी

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 02:36 PM (IST)

    ला नीना के सक्रिय होने की भविष्यवाणी के साथ इस बार सर्दियों में बर्फबारी की उम्मीद बढ़ गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार सितंबर से ला नीना का प्रभाव शुरू होने की संभावना है जिससे उत्तरी गोलार्ध में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। नमी की मात्रा में वृद्धि और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमपात की अनुकूल परिस्थितियाँ बनेंगी जिससे नैनीताल और मुक्तेश्वर जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है।

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    ला नीना ने जगाई सर्दियों में बर्फबारी की उम्मीद. File

    रमेश चंद्रा, नैनीताल। ला नीना के सक्रिय होने के पूर्वानुमान ने इस बार की सर्दियों में बर्फबारी की उम्मीदें जगा दी हैं। एनओएए ने सितंबर से इसके सक्रिय होने का पूर्वानुमान जताया है। जिसके चलते इस बार भारत समेत उत्तरी गोलार्ध की सर्दियां कड़ाके की ठंड के साथ गुजरने वाली है।

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    आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ वायुमंडलीय विज्ञानी डा नरेंद्र सिंह ने बताया कि दुनिया के मौसम को प्रभावित करने वाला मौसमी चक्र ला नीना के सक्रिय होने का पूर्वानुमान अमेरिका की नेशनल ओसिएनिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) ने जता दिया है, जो सितंबर में सक्रिय होने जा रहा है।

    इसका असर जनवरी तक जारी रहने का अनुमान है। इस बीच भारत में सर्दियों का मौसम रहता है और ला नीना का असर प्रभावी रहा तो सर्दियों में दो हजार मीटर तक की ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात की प्रबल संभावना रहेगी। उत्तरी गोलार्ध में सितंबर से तापमान ने कमी आनी शुरू हो जाती है और दिसंबर आते आते बेतहाशा ठंड पड़नी शुरू हो जाती है।

    इस दौरान ला नीना प्रभावी रहा तो हिमपात के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाएगी। साथ ही बर्फबारी के लिए पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना भी जरूरी है। बहरहाल इस बार मानसून देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक पानी बरसा रहा है। जिस कारण नमी की मात्रा में खासी बढ़ोतरी हुई है, जो शीतकालीन वर्षा और हिमपात के लिए अनुकूल होती हैं। जिसके चलते संभावना जताई जा सकती है कि इस बार का शीतकाल अत्यधिक ठंड के साथ हिमपात में बढ़ोतरी लाएगा।

    नैनीताल व मुक्तेश्वर की वादियों में फिर नजर आएगी बर्फ

    नैनीताल: पर्यावरण विज्ञानी डा नरेंद्र सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मध्य हिमालय क्षेत्र में आने वाले नैनीताल व मुक्तेश्वर सरीखे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देखा गया है। इन क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक बढ़ गया है। जिसका बड़ा असर यहां होने वाली बर्फबारी पर भी पड़ा हैं। पिछले कुछ वर्षों से इन क्षेत्रों में होने वाले हिमपात में भारी कमी आई है। इस बार ला नीना के कारण इन क्षेत्रों में हिमपात की संभावना बनी रहेगी।

    दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है ला नीना

    नैनीताल: अल नीनो और ला नीना दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। यह दोनों प्राकृतिक जलवायु में असर डालने वाले दो कारण है। इनकी सक्रियता से मौसम के गर्म अथवा ठंडा रहने पर अनुमान लगाना आसान हो जाता है।

    अल नीनो पैटर्न एक गर्म चरण है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जो गर्मी बढ़ाने में सहायक होता है। इसके विपरीत ला नीना एक ठंडा चरण है, जिसमें समुद्र के पानी का तापमान असामान्य रूप से गिरने लगता है। जिस कारण वैश्विक स्तर पर तापमान में कमी आने से ठंड बढ़ जाती है।