कौन हैं उत्तराखंड के राज्यपाल रि. ले. जनरल गुरुमीत सिंह, चीन और कश्मीर मामलों के रहे हैं एक्सपर्ट
उत्तराखंड के राज्यपाल रि. ले. जनरल गुरमीत सिंह ने 36 सलों तक भारतीय सेना के विभिन्न पदों को सुशोभित किया। रि. लेफ्टिनेंट जनरल अपने सेवाकाल के दौरान बेहद ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ सेना में जो भी जिम्मेदारियां मिलीं उनका पूरी गंभीरता से निर्वहन किया।

नैनीताल, जागरण संवाददाता : उत्तराखंड के राज्यपाल रि. लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना के उच्च पदों पर रहने के साथ काउंटर टेररिज्म आपरेशन के भी एक्सपर्ट रह चुके हैं। करीब 36 साल की सेवा के बाद वह 2016 में डिप्टी आर्मी चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए। बीते साल साल जब उत्तराखंड की राज्यपाल रहीं बेबी रानी मौर्या ने अपना इस्तीफा सौंपा तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रिटार्यड लेफ्टीनेंट जनरल को इस पर नियुक्त करने फैसला किया। जालिए जानते हैं उनके और सेना में दिए उनके योगदान के बारे में।
36 साल तक भारतीय सेना में विभिन्न पदों को किया सुशोभित
उत्तराखंड के राज्यपाल रि. ले. जनरल गुरमीत सिंह ने 36 सलों तक भारतीय सेना के विभिन्न पदों को सुशोभित किया। रि. लेफ्टिनेंट जनरल अपने सेवाकाल के दौरान बेहद ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ सेना में जो भी जिम्मेदारियां मिलीं, उनका पूरी गंभीरता से निर्वहन किया। सेन में वह डिप्टी आर्मी चीफ के अलावा एडजुटेंट जनरल के अलावा कोर कमांडर के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। कोर कमांडर पर ही कश्मीर में एलओसी की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। वह इंडियन आर्मी के सबसे प्रतिष्ठित अफसरों में शामिल रहे हैं।
असम रेजीमेंट से कमीशन से मिला था कमीशन
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह असम रेजीमेंट से कमीशन मिला है। वो सैनिक स्कूल कपूरथला पंजाब के छात्र रहे हैं। उन्होंने डिफेंस सिर्विसेज आफ स्टाफ कोर्स और नेशनल डिफेंस कालेज से स्नातक किया है। इसके साथ ही एमफिल की उनके पास दो डिग्रियां हैं। एक चेन्नई यूनिवर्सिटी से और दूसरी इंदौर यूनिवर्सिटी से। इसके अलााव वह जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से भारत-चीन मुद्दों पर भी रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्रियां सेना से मिली लीव के दौरान हासिल की।
चीन और एलओसी के मुद्दों को हैंडिल किया
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के पास चीन और कश्मीर से निपटने का लंबा अनुभव है। चीन से जुडे़ आपरेशनल मसलों और सेना की रणनीति को उन्होंने करीब से देखा है। एडिशनल डायरेक्टर जनरल आफ मिलिट्री आपरेशन रहते हुए उन्होंने चीन के समले को हैंडिल किया है। इस पर रहते हुए उन्हें सात बार चीन का दौरा करने का मौका मिला। इसके साथ एलओसी पर भी कई डिप्लोमैटिक मीटिंग आपने होल्ड की है। आपको इंटेलीजेंस के मसलों की भी बेहतर समझ है।
लेफ्टिनेंट जनरल को अब तक मिल चुके सम्मान
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को सेना में उनके सेवाकाल में थल सेनाध्यक्ष द्वारा चार राष्ट्रपति पुरस्कार और दो प्रशंसा से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा जा चुका है।
परिवारिक पृष्ठभूमि
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सैन्य पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता मोहन सिंह भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। जबकि बड़े भाई ने भारतीय वायु सेना में अपनी सेवाएं दी हैं। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह की शादी गुरुमीत कौर से हुई है। उनके दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी हैं। रिटायरमेंट के बाद वह टीवी-चैनल की बहसों में भी शामिल होते रहे हैं। सिख कम्म्यूनिटी से वह उत्तराखंड के दूसरे राज्यपाल हैं। उनके पहले सिख समाज से सरदार सुरजीत सिंह बरनाला उत्तराखंड के राज्यपाल रह चुक हैं।
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