नैनीताल, जेएनएन : आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज की ओर से वायु प्रदूषण पर एशियन देशों की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हो गई है। गुरुवार को इस्टरलीन में आयोजित कार्यशाला के पहले दिन सेटेलाइट से आंकड़े जुटाना व वायु प्रदूषण की जांच को लेकर इजात किए जा रहे अत्याधुनिक उपकरणों का संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में 15 देशों के वैज्ञानिक व शोधार्थी पहुंचे हुए हैं।

जापानी वैज्ञानिक डॉ. हिरोशी तनिमोटो ने इस मौके पर कहा कि पर्यावरण को बचाना है तो वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लाना होगा। इसके लिए वैज्ञानिक उपाय तो खोजने ही होंगे, वहीं बड़े पैमाने में लोगों में जागरूकता लानी होगी। इसके लिए देशों के बीच आपसी तालमेल होना बेहद जरूरी है। सिंगापुर के डॉ. डेविड कोह ने कहा कि वायु प्रदूषण के आंकड़ों पर पैनी नजर बेहद जरूरी है। आंकड़े जुटाने के लिए वर्तमान में सेटेलाइट की सुविधा उपलब्ध हो गई हैं। इस सुविधा से हम रोजाना बड़े पैमाने में आंकड़े प्राप्त कर इस पर नियंत्रण पाने के उपाय खोज सकते हैं। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. मनीष नाजा ने कहा कि विकासशील देशों में वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या पर अंकुश लगाने के अत्याधुनिक तकनीक इजात किए जाने की सख्त जरूरत है। इस दिशा में विकसित देशों की तर्ज पर हमें भी कार्य करने होंगे। पूना के वैज्ञानिक डॉ. सचिन घुणे ने कहा कि वायु प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। लिहाजा हमे हवा की शुद्धता को बनाए रखने होगा।

इस मौके पर वायु प्रदूषण को लेकर दुनिया में इजात अत्याधुनिक उपकरणों का प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें सेटेलाइट से आंकड़े एकत्र करने की तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा अन्य उपकरणों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण देने के लिए फ्रांस की डॉ. सिलविया बूसी, यूके की डॉ. इक मील व जापान की डॉ. नाव्या ने विशेष भूमिका निभाई। जिसमें डाटा की माडल बनाने के तरीके भी बताए गए। कार्यशाला का उद्घाटन शुक्रवार को किया जाएगा। इस अवसर पर सिंगापुर की डॉ. लिया, एरीज के वैज्ञानिक डॉ. उमेश मठपाल, चीन, जापान, रसिया, इरान, तुर्की, म्यामार, अफगानिस्तान, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, ताईवान, श्रीलंका आदि देशों के वैज्ञानिक व शोधार्थी मौजूद थे।

सार्थक परिणाम आएंगे सामने

एरीज का निदेशक डॉ. वहाबउदद्ीन ने कहा कि वायु प्रदूषण पर आयोजित की जा रही एशियाई देशों की कार्यशाला में इसके नियंत्रण को लेकर सार्थक परिणाम सामने आएंगे। जिनके आधार पर सरकार योजनाएं बनाएगी। इस उद्देश्य को लेकर कार्यशाला में एशिया के कई देशों को आमंत्रित किया गया। कार्यशाला में शामिल होने के लिए आमंत्रित सभी देशों ने खुशी जाहिर की।

Posted By: Skand Shukla

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