महाभारत के संजय को मिलेगी मानद उपाधि, UGC के पूर्व चेयरमैन डीपी सिंह समेत इन लोगों यूनिवर्सिटी देगी सम्मान
कुमाऊं विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में महाभारत के संजय यानी ललित मोहन तिवारी और पूर्व यूजीसी अध्यक्ष प्रो. धीरेंद्र प्रताप सिंह को मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। ललित मोहन तिवारी को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर और प्रो. सिंह को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि प्रदान की जाएगी। यह पहली बार है जब किसी नैनीताल निवासी सिने अभिनेता को यह सम्मान दिया जा रहा है।

किशोर जोशी, नैनीताल: कुमाऊं विवि के 19 वें दीक्षा समारोह में महाभारत के संजय अर्थात नैनीताल निवासी प्रसिद्ध अभिनेता ललित मोहन तिवारी तथा अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व यूजीसी के पूर्व चेयरमैन प्रो डीपी सिंह को मानद उपाधि प्रदान की जाएगी।
कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो दीवान सिंह रावत की ओर से की ओर से दीक्षा समारोह में मानद उपाधि के लिए तीन नाम कुलाधिपति को भेजे थे। राज्यपाल ने प्रो सिंह को डाक्टर आफ साइंस तथा अभिनेता ललित तिवारी को डाक्टर आफ लिटरेचर की मानद उपाधि प्रदान करने को सहमति प्रदान की है। यह पहला मौका है जब नैनीताल निवासी प्रसिद्ध सिने अभिनेता व डीएसबी परिसर के पूर्व छात्र को विवि की ओर से यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया जाएगा।
यूजीसी के पूर्व चेयरमैन रहे हैं डीपी सिंह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार धीरेंद्र प्रताप सिंह को इसी साल अप्रैल में भारत सरकार ने पांच साल के लिए टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज का चांसलर नियुक्त किया है। सिंह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन भी रह चुके हैं। मध्य प्रदेश के सागर में हर सिंह गौर विवि, बनारस हिंदू विवि और देवी अहिल्या विवि के कुलपति भी रहे।
वह राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद या नैक के चेयरमैन भी रहे। वह स्कूल आफ रिसर्च मेथोडोलाजी आफ टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज में एसोसिएशन डीन व प्रोफेसर रहे। टाटा इंस्टीट्यूट में 1985 से काम कर रहे हैं। विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन से सांख्यकी में पीएचडी की है। सिंह ने गढ़वाल विवि से वनस्पति विज्ञान में डाक्टर आफ फिलोशॉफी की उपाधि प्राप्त की। डा सिंह ने
भारतीय उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को भी बढ़ावा दिया है, इसलिए उन्होंने ब्रिटेन, यूएसए, जर्मनी, फ्रांस, नॉर्वे, डेनमार्क, चीन, ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, थाईलैंड, मलेशिया, फिजी, मॉरीशस, सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में कई शैक्षणिक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। प्रो सिंह को प्रतिष्ठित राष्ट्र निर्माता पुरस्कार, पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार और राजा बलवंत सिंह शिक्षा सम्मान शामिल हैं।
यूजीसी में उनके नेतृत्व ने अकादमिक उत्कृष्टता के लिए बेंचमार्क की स्थापना, वैश्विक सहयोग को बढ़ाया और एक सहायक और समावेशी शिक्षण वातावरण को बढ़ावा दिया। अपने दूरदर्शी नेतृत्व, नीति में व्यापक योगदान और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति समर्पण के माध्यम से, प्रो. धीरेंद्र पाल सिंह ने भारत की शिक्षा प्रणाली पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
अनुभवी अभिनेता हैं तिवारी, महाभारत में कथावाचक संजय की निभाई दमदार भूमिका
नैनीताल के तल्लीताल बाजार निवासी ललित मोहन तिवारी एक अनुभवी अभिनेता हैं, जो भारतीय रंगमंच और सिनेमा में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। नैनीताल में पले-बढ़े तिवारी ने 1970 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और 1971 में डीएसबी परिसर, नैनीताल से कला स्नातक की डिग्री हासिल की। इस दौरान, उन्होंने पांच साल तक नैनीताल में राशन कार्यालय में भी काम किया।
उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब उन्होंने 1976 में डीएसबी कॉलेज के रजत जयंती समारोह के दौरान लेनिन पंत के निर्देशन में धर्मवीर भारती की अंधा युग में अभिनय किया। निर्देशक के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर, ललित मोहन तिवारी ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन किया और प्रवेश प्राप्त किया। उन्होंने 1977 से 1980 तक बीएम साह, बीसी कारत, मोहन उप्रेती, इब्राहिम अलकाज़ी जैसे दिग्गज गुरुओं के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया।
अपने शानदार थिएटर करियर के दौरान, ललित मोहन तिवारी ने 60 से अधिक नाटकों में अभिनय किया इन प्रदर्शनों ने उन्हें मंच कला के उस्ताद के रूप में स्थापित किया और सिनेमा में कदम रखते हुए।
ललित मोहन तिवारी ने 50 से अधिक फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। कमल स्वरूप की ओम दर बदर में मुख्य भूमिका, जिसने बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में क्रिटिक्स अवार्ड जीता। उन्होंने सुधीर मिश्रा की ये वो मंजिल तो नहीं में भी काम किया, जो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म थी।
इसके अलावा, उन्होंने एफटीआइ पुणे के छात्र प्रोडक्शन चाबी वाली पॉकेट वॉच में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे छात्र ऑस्कर में प्रविष्टि के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। श्याम बेनेगल के साथ अक्सर सहयोग करते हुए डिस्कवरी आफ इंडिया, सूरज का सातवां घोड़ा और अंतर्नाद में नजर आए।
अन्य प्रमुख फ़िल्मों में केतन मेहता की मंगल पांडे, सरदार पटेल (जिसमें उन्होंने मौलाना आजाद की भूमिका निभाई), सईद मिर्जा की नसीम, डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी की सम्राट पृथ्वीराज और वेलकम टू सज्जनपुर शामिल हैं।
तिवारी ने टेलीविजन पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है, उन्होंने करीब 30 धारावाहिकों में काम किया है। उनकी सबसे प्रमुख भूमिकाओं में संजय खान निर्देशित 1857 की क्रांति में बाजीराव पेशवा और बीआर चोपड़ा की पौराणिक महाभारत में संजय, कथावाचक की भूमिका शामिल है।
अब तक इन विभूतियों को मिल चुकी है मानद उपाधि
कुमाऊं विवि अब तक दो दर्जन विभूतियों को मानद उपाधि प्रदान कर चुका है। इसमें प्रसिद्ध विज्ञानी प्रो डीडी पंत, कथाकार ईला चंद्र जोशी, भारत रत्न जीबी पंत को मरणोपरांत, प्रसिद्ध विज्ञानी प्रो. श्रीकृष्ण जोशी, साहित्यकार शैलेश मटियानी, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल बीसी जोशी, प्रो देशबंधू बिष्ट, ले जनरल जीएस रावत, पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, पूर्व राज्यपाल बीडी पाण्डे, कानूनविद फली एस नरिमन, आरबीआइ के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन, डा एचसी पाण्डे, पर्यावरणविद आरके पचौरी, कैंसर रोग विशेषज्ञ डा एमसी पंत, साहित्यकार मृणाल पाण्डे व हिमांशु जोशी, पर्यावरणविद चंडीप्रसाद भट्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबाल, सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, पूर्व सचिव भास्कर खुल्बे, पदमश्री गोवर्धन मेहता आदि।
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