नैनीताल, [जेएनएन]: हाईकोर्ट ने अहम फैसले में साफ कर दिया है कि हायर ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा में शामिल पेपर का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल 11 दिसंबर को रणविजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित मामले में दिए गए फैसले को आधार बनाते हुए कहा गया है कि परीक्षा का पुनर्मूल्यांकन नियमों में नहीं है और साधारणतया पुनर्मूल्यांकन के आदेश नहीं दिए जा सकते। फिर भी यदि कोई संदेह उत्पन्न होता है तो उसको परीक्षा आयोजक को देखेगा, न कि अभ्यर्थी। कोर्ट ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस की मुख्य परीक्षा को चुनौती देती इस याचिका को खारिज कर दिया। 

दरअसल, नैनीताल की अधिवक्ता अंजलि नौलियाल ने याचिका दायर कर एचजेएस की मुख्य परीक्षा को चुनौती दी थी। याचिका में परीक्षा के तीसरे पेपर के पुनर्मूल्यांकन की मांग करते कहा गया था कि पिछले चार-पांच साल में एचजेएस परीक्षा में एक भी अनुसूचित जाति का अभ्यर्थी क्वालीफाई नहीं कर सका। याची ने खुद को एससी और महिला अभ्यर्थी होने का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा में संविधान के तमाम अनुच्छेदों का उल्लंघन किया गया है। कॉपी का मूल्यांकन गलत तरीके से किया गया। 

वहीं हाई कोर्ट के अधिवक्ता ने आरोपों को गलत बताते हुए याचिका को आधारहीन करार दिया। साथ ही बताया कि परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के उत्तीर्ण अंक न्यूनतम 40 फीसद व कुल क्वालीफाईंग अंक 50 फीसद हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के न्यूनतम 30 अंक व क्वालीफाइंग अंक 40 फीसद रखे गए। जो याची द्वारा अर्जित नहीं किए गए। इसलिए मुख्य परीक्षा परिणाम को निरस्त करने का कोई आधार नहीं बनता और ना ही याची इसका कोई आधार प्रस्तुत कर पाई। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। 

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Posted By: Raksha Panthari

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