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उत्तराखंड के रिंग रोड प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, एक स्टेप आगे बढ़ा प्रोसेस; जल्द जाम से मिलेगी मुक्ति

Published: Wed, 25 Mar 2026 10:54 AM (IST)

हल्द्वानी रिंग रोड परियोजना के सर्वेक्षण के लिए तीन कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया है। हरियाणा, दिल्ली और पंजाब की ये कंपनियां अब वित्तीय बोली प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगी।

टेंडर में तीन कंपनियां पहुंची, फाइनेंशियल बीट के बाद निर्णय।

टेंडर में तीन कंपनियां पहुंची, फाइनेंशियल बीट के बाद निर्णय।

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। नौ साल पुराने रिंग रोड प्रोेजेक्ट के सर्वेे को लेकर आयोजित टेंडर में हरियाणा, दिल्ली और पंजाब से जुड़ी तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया है। कंपनियों के अनुभव की जांच के बाद मामला फाइनेंशियल बीट की तरफ बढ़ेगा। चयनित फर्म को वनभूमि, पेड़ों की संख्या, प्रोजेक्ट के डिजाइन से लेकर बजट प्रस्ताव भी तैयार करना होगा। लोनिवि अफसरों का कहना है कि जल्द प्रक्रिया पूरी कर सर्वे शुरू कर दिया जाएगा।

हल्द्वानी के लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए अप्रैल 2017 में रिंग रोड प्रोजेक्ट की घोषणा हुई थी। इसके बाद फिजिबिलिटी टेस्ट के लिए क्राफ्ट कंसलटेंसी नाम की कंपनी को 1.57 करोड़ का भुगतान भी किया गया। मगर अब यह प्रोजेक्ट छोटा हो चुका है। पहले लामाचौड़ से गन्ना सेंटर की ओर सड़क घुमनी थी। मगर किसानों की जमीन और घरों के जद में आने पर विरोध की स्थिति पैदा हो गई।

राजस्व रिकार्ड खंगालने पर पता चला कि 19 हेक्टेयर निजी जमीन और 105 घरों के जद में आने की वजह से 700 करोड़ रुपये तो केवल मुआवजे को चाहिए। लोगों के विरोध औैर भारी भरकम बजट के चलते शासन ने निर्णय बदल लिया। इसके बाद तय हुआ कि रिंग रोड को पूर्ण रूप से वनभूमि से पास किया जाएगा। इसलिए भाखड़ा पुल से फायर लाइन फिर जंगल के अंदर से रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास सड़क को कनेक्ट करने पर मुहर लगी।

फरवरी में शासन ने सर्वेे को लेकर 26.35 लाख रुपये भी जारी कर दिए। जिसके बाद लोनिवि की हल्द्वानी डिवीजन ने टेंडर आमंत्रित किया। अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार ने बताया कि दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से जुड़ी तीन कंपनियों ने टेंडर में प्रतिभाग किया है। इनमें से किसी एक का चयन कर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

कैसे पूरी होगी टेंडर प्रक्रिया

तीनों कंपनियों की तकनीकी अनुभव की जांच होगी। इसमें तकनीकी टीम, मानव संसाधन से लेकर जरूरी मशीनों के बारे में पता किया जाएगा। तीनों के पास होने पर मामला फाइनेंशियल बीट की तरफ बढ़ेगा। जिस कंपनी की टेंडर दरें कम होगी। उसे काम मिलेगा।

प्राथमिक आंकलन में 172 करोड़ की जरूरत

जंगल क्षेत्र में रिंग रोड के निर्माण को लेकर विभागीय स्तर पर पूर्व में आंकलन किया गया था। पता चला कि 18 किमी लंबी सड़क के निर्माण को 56 हेक्टेयर वनभूमि के हस्तांतरण के साथ 4280 पेड़ काटने पड़ेंगे। जबकि सड़क बनाने पर 172 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। हालांकि, फाइनल रिपोर्ट के लिए विशेषज्ञ कंपनी की जरूरत थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार को जमीन हस्तांतरण और राज्य सरकार से बजट की मांग होनी है। इसलिए टेंडर आमंत्रित किया गया है।

सड़क के बनने के फायदे

  • रामपुर रोड से कालाढूंगी को जाने वाले वाहनों को शहर में नहीं जाना पड़ेगा। कालाढूंगी-रामनगर से रुद्रपुर जाने वाली गाड़ियां भी लामाचौड़ से कालूसिद्ध मंदिर व आबादी के बीच में नही घुसेगी।
  • सड़क को जंगल क्षेत्र से गुजारा जा रहा है। जिसके आसपास 20 से अधिक ग्राम पंचायतें पड़ती है। हजारों की आबादी वाले इन क्षेत्रों को चौड़ी सडक मिलने पर आने-जाने में सुविधा भी होगी।
  • पर्यटन सीजन के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। अभी जिन सड़काें पर वाहन डायवर्ट होते हैं। वहां घर-दुकानें होने से और जाम लगता है। रिंग रोड बनने पर नया डायवर्जन ट्रैक भी मिलेगा।
  • रामनगर से जिन लोगों को लालकुआं या बरेली की तरफ जाना होगा। उनकी गाड़ियां भाखड़ा पुल से बेलबाबा और फिर गन्ना सेंटर के पास से बरेली रोड को चली जाएंगी।

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