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    Martyrs Day : बापू के विचारों को समर्पित है हल्द्वानी का गांधी इंटर कालेज, यहां 70 फीसद बच्चे आरक्षित श्रेणी के अध्ययनरत

    By Prashant MishraEdited By:
    Updated: Sat, 30 Jan 2021 01:30 PM (IST)

    आजादी से पहले हल्द्वानी में स्कूलों की संख्या बेहद कम थी। कोई बड़ा स्कूल न होने के सक्षम परिवार अपने बच्चों को दूसरे शहरों में भेज देते थे जबकि निर्धन तबका अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाता था।

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    स्कूल में 75 फीसद छात्र अल्पसंख्यक, एसी-एसटी श्रेणी के पढ़ते हैं।

    हल्द्वानी, भानु जोशी। गरीबों के उत्थान का सपना बापू हमेशा देखा करते थे। उन्होंने इसके प्रयास भी किए। बापू के विचारों से प्रेरित होकर लोग स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी संख्या कूदे थे। ऐसे ही कुछ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और प्रबुद्धजनों ने गरीब बच्चों को शिक्षा देने के उद्देश्य से हल्द्वानी में 1952 में 'महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी स्कूलÓ की नींव रखी, जिसे अब महात्मा गांधी इंटर कालेज के नाम से जाना जाता है।

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    प्रबंधक मोहन सिंह बोरा ने दैनिक जागरण को बताया कि आजादी से पहले हल्द्वानी में स्कूलों की संख्या बेहद कम थी। कोई बड़ा स्कूल न होने के सक्षम परिवार अपने बच्चों को दूसरे शहरों में भेज देते थे, जबकि निर्धन तबका अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाता था। बापू के गरीबों के उत्थान के विचार से प्रेरित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और प्रबुद्धजनों ने हल्द्वानी में स्कूल की नींव रखने की योजना बनाई। एक समिति बनाई गई, जिसमें श्याम लाल वर्मा अध्यक्ष, गंगा सिंह बोरा संस्थापक, प्रबंधक एवं मंत्री, हीरा बल्लभ बेलवाल कोषाध्यक्ष, राम आश्रय बतौर सदस्य रहे।

    1952 में शहर के एशबाड़ी स्थित डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के आफिस की इमारत में महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी नाम से स्कूल खोला गया। शुरुआती दौर में यहां 200 बच्चों ने दाखिला लिया था। स्कूल की लोकप्रियता को देखते हुए इसे 1970 में इंटर तक उच्चीकृत किया गया। बरेली रोड पर 26 बीघा के भूखंड पर स्कूल को अपनी जमीन दिलाई गई, जहां अब यह स्कूल महात्मा गांधी इंटर कालेज नाम से संचालित होता है। वर्तमान में यहां 700 से अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं। खास बात ये है कि इस स्कूल में 75 फीसद छात्र अल्पसंख्यक, एसी-एसटी श्रेणी के पढ़ते हैं।