नैनीतान, जेएनएन : उत्तराखंड हाइकोर्ट ने राज्य में चारधाम देवस्थानम बोर्ड के गठन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई एक सप्ताह के बाद की नियत की है । मामले में सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर अधिनियम का बचाव किया है। साथ ही एक्ट को विधिसम्मत करार दिया है। याचिका को पोलिटिकल स्टंट व प्रचार पाने का माध्यम करार दिया है।

इस मामले में अंतिम सुनवाई 29 जून सोमवार को होगी। रुलक कि ओर से भी इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर कर सरकार के अधिनियम को संवैधानिक करार देते हुए जनहित याचिका को खारिज करने की प्रार्थना की है।

 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में भाजपा के सदस्य राज्य सभा व चर्चित अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश सरकार द्वारा चारधाम के मंदिरों के प्रबंधन को लेकर लाया गया देवस्थानम् बोर्ड अधिनियम असंवैधानिक है।

 

देवस्थानम् बोर्ड के माध्यम से सरकार द्वारा चारधाम व 51 अन्य मंदिरों का प्रबंधन लेना संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 का उल्लंघन है। सरकार के इस फैसले के बाद प्रभावित धार्मिक स्थानों व मंदिरों के पुजारियों में भारी रोष पैदा हो गया था। स्वामी ने कहा कि पूर्व में तमिलनाडु,आंध्रप्रदेश , केरल व महाराष्ट ने भी इस तरह के निर्णय लिए थे।

 

जिनके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थी और उनको जीत मिली थी। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय पहले से ही हैं। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के फैसले को भाजपा की नीतियों के भी खिलाफ बताया है। पूर्व में जिन राज्यो ने इस तरह के निर्णय लिए थे, उन्होंने कभी मस्जिद गिरजाघर को शामिल क्यों नही किया, सिर्फ मन्दिरों को ही शामिल क्यों किया गया।

 

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