जागरण संवाददाता, चम्पावत : शासन ने श्यामलाताल झील निर्माण के लिए स्वीकृति 78.82 लाख रुपये के सापेक्ष 32 लाख रुपये की पहली किश्त जारी कर दी है। डिटेल इस्टीमेट गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शीघ्र ही झील निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। झील निर्माण के बाद श्यामलाताल में पर्यटन विकास की संभावनाएं काफी अधिक बढ़ जाएंगी।

विधायक कैलाश गहतोड़ी के पीआरओ दीपक मुरारी ने बताया कि श्यामलाताल झील को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। डिटेल इस्टीमेट गठित करने के लिए 32 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही झील निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। इधर झील को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों ने विधायक का आभार जताया है। वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम पांडेय, हरीश पांडेय, शंकर सिंह खाती, शंकर दत्त जोशी, क्षेत्र की बीडीसी सदस्य दीपा जोशी, भाजपा मंडल अध्यक्ष गुमान सिंह, जौल के पूर्व प्रधान केएन तिवारी, ग्राम प्रधान जगदीश लाल ने बताया कि श्यामलाताल में झील बनने के बाद पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी, जिससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा। उन्होंने इसके लिए विधायक का आभार जताया है। विधायक कैलाश गहतोड़ी ने बताया कि डिप्टेश्वर कूर्म सरोवर झील स्वीकृति के बाद श्यामलाताल झील को मंजूरी मिल गई है। शीघ्र ही विधान सभा क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण सड़कों को भी स्वीकृति मिल जाएगी।  

धामीसौन-खेतीखान सड़क का सर्वे पूरा

चम्पावत : बहुप्रतीक्षित चम्पावत-ढकना-मल्ला धामीसौन-खेतीखान मोटर मार्ग का सर्वे पूरा हो गया है। रोड बनने के बाद जिला मुख्यालय से खेतीखान की दूरी वर्तमान दूरी से आधी हो जाएगी। इस महत्वाकांक्षी सड़क बनने से कई गांव पहली बार सड़कसुविधा से जुड़ जाएंगे। सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है।

राज्य योजना से मंजूर इस सड़क के लिए शासन ने दो महीने पहले 1.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह सड़क लोगों की दूरी को कम करने के साथ एतिहासिक एकहथिया नौला और चंडालकोट के किले तक पर्यटकों की पहुंच आसान करेगी। चम्पावत से खेतीखान के लिए दो सड़कें हैं। पहली ललुवापानी होकर और दूसरी लोहाघाट होते हुए। ललुवापानी होकर 31 किमी एवं लोहाघाट होकर 29 किमी की दूरी है। अब चम्पावत-ढकना-मौरलेख-मल्ला धामी सौन-खेतीखान सड़क बनने से बेलटाक, धामीसौन, खलकंडिया आदि गांव सड़क से जुड़ जाएंगे। इसके अलावा चम्पावत-खेतीखान के बीच की दूरी भी मात्र 17 किमी रह जाएगी। लोनिवि के सहायकअभियंता राजीव कुमार ने बताया है कि सड़क का सर्वे पूरा कर लिया गया है। समरेखन पूरा होने के बाद वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भेजा जाएगा। वन विभाग की अनापत्ति मिलने के बाद डीपीआर भेजी जाएगी।

Edited By: Prashant Mishra