हल्द्वानी, जेएनएन : कुछ हटकर ड्रेसिंग सेंस व आकर्षक हेयर स्टाइल को फैशन ट्रेंड समझने वाले यूथ में टैटू कल्चर भी तेजी से बढ़ रहा है। शहर में संचालित आधा दर्जन टैटू सेंटर पर रोजाना 40 युवा पहुंच रहे हैं। युवतियों में भी इसका क्रेज कम नहीं है। रोज करीब दस लड़कियां टैटू बनवाने पहुंच रही हैं। भक्ति से लेकर अपनों से प्यार जताने के लिए वह टैटू का सहारा ले रहे हैं। वहीं शहर के कई युवा पार्ट टाइम जॉब के तौर पर भी इस फील्ड में काम कर रहे हैं। हाथ व पांव गुदवाने की परंपरा काफी पुरानी है। एक जमाने में आदिवासी व जनजाति समुदाय के लोग पहचान के तौर पर शरीर के अंगों पर कलाकृति बनाते थे। लेकिन अब यह फैशन बन चुका है। हल्द्वानी में तीन साल पहले यह फैशन शुरू हुआ था। शुरुआत में लोग दिल्ली व दून तक टैटू बनवाने जाते थे, पर अब तिकोनिया, मुखानी, नैनीताल रोड व दुर्गा सिटी सेंटर में आधा दर्जन सेंटर खुल चुके हैं। पांच सौ रुपये स्कवायर इंच के हिसाब से यहां चार्ज लिया जाता है।

जिम लवर को रेसलर आर्म टैटू पंसद

जिम में रोज पसीना बहाकर बॉडी बनाने वाले युवाओं में टैटू का क्रेज सबसे ज्यादा है। बांहों पर रेसलरों की तरह वह टैटू बनवा रहे हैं। इसके अलावा हाथ पर रिंग बनाने का शौक भी है। वहीं धार्मिक मंत्र, भगवान शिव की अलग-अलग भंगिमाओं की छवि, लकी नंबर, जन्मतिथि तक गुदवाई जा रही है।

छह-सात घंटे भी लगते

तिकोनिया में नीडल प्वाइंट टैटू स्टूडियों के संचालक विशाल ने बताया कि बड़े व डिजायनदार टैटू बनाने में छह-सात घंटे का समय लगता है। इन दिनों पारिवारिक सदस्य का फोटोनुमा टैटू बनाने का क्रेज बढ़ रहा है। इन्हें स्टोरी कहा जाता है। पत्नी या प्रेमिकाओं का नाम तक लिखने का क्रेज भी है।

इन सावधानियों को बरते

टैटू गुदवाने के बाद उसे 45 दिन उभरने में लगते हैं। 15 दिन तक धूप व पानी से बचाना जरूरी है। इसके अलावा उस हाथ से वजन उठाना दिक्कत पैदा कर सकता है। 15 दिन तक खास किस्म का ऑयल भी लगाना पड़ता है।

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