विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दुनिया में चमके उत्तराखंड के जलविज्ञानी शैलेश खर्कवाल, 'नेट जीरो विलेज मॉडल' बदलेगा पहाड़ के गांवों की तस्वीर

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:59 AM (IST)Updated: Thu, 05 Nov 2026 12:05 PM (IST)

जल वैज्ञानिक डॉ. शैलेश खर्कवाल उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों के लिए 'नेट जीरो विलेज मॉडल' ला रहे हैं। यह मॉडल ...और पढ़ें

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

किशोर जोशी, नैनीताल। चंपावत के खर्कगांव निवासी व आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र व जल वैज्ञानिक डॉ. शैलेश खर्कवाल ने वैश्विक मंच पर नाम रोशन किया है। उनके स्टार्टअप 'एन्वायरनसेंस' ने पानी में भारी धातुओं और विषाक्तता की रियल-टाइम निगरानी हेतु अत्याधुनिक सेंसर तकनीक विकसित की है।

अब वे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण, सौर ऊर्जा व जैविक खेती का समन्वय बनाकर गांवों को आत्मनिर्भर बनाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुहिम की शुरुआत खर्कगांव से करने का आग्रह किया है।

सीएम धामी ने किया मुहिम की शुरुआत खर्कगांव से करने का आग्रह

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल-संरक्षण और रीसाइक्लिंग में अपनी विशेषज्ञता सिद्ध करने के बाद डॉ. खर्कवाल ने इन उन्नत तकनीकों को भारत में जल जीवन मिशन और जल शक्ति अभियानों से भी जोड़ा है। जल का बल नारे के साथ उनका स्टार्टअप एच-20 मंत्रा' देश के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छ पेयजल और जल शोधन पर काम कर रहा है।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए नेट जीरो विलेज की अभिनव अवधारणा को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और जैविक खेती का समन्वय स्थापित कर पहाड़ी गांवों को ऊर्जा और संसाधनों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।

इसके तहत सौर

यह भी पढ़ें- एयरपोर्ट के सीवेज और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का सिविल कार्य पूरा, इस तारीख तक होगा तैयार

यह भी पढ़ें- वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की धीमी प्रगति देख प्रयागराज के मंडलायुक्त नाराज, अनुपस्थित AE के खिलाफ की कार्रवाई

ऊर्जा आधारित पंपिंग प्रणाली से दूरदराज के जलस्रोतों से ऊंचाई वाले टैंकों तक पानी पहुंचाने और एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक के जरिये एक ही भूमि पर खेती व सौर ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कार्य करने की योजना है।

डॉ. खर्कवाल के नेतृत्व में उनकी कंपनियां भारत सहित सिंगापुर सहित पांच देशों में वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट और वॉटर रिसाइकिलिंग कर रही हैं। इसकी भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय व पीएमओ ने भी सराहना की है। डॉ. खर्कवाल ने हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वर्चुअल बातचीत कर वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञता को अपनी माटी के विकास से जोड़ने की प्रतिबद्धता दिखाई है।

ये है नेट जीरो मॉडल?

पारंपरिक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट महंगे होते हैं, लेकिन एच-20 मंत्रा ऐसी स्वदेशी व कम लागत वाली तकनीक विकसित की है, जिससे गंदे पानी को साफ किया जा सके। फेस्ट्री, सोसायटी और गांवों से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट कर दोबारा खेती-बागबानी और औद्योगिक कार्यों के उपयोग में लाया जाता है।

इस मॉडल के तहत घरों के किचन व बाथरूम से निकले पानी को प्राकृतिक फिल्टर प्रणाली से साफ कर सिंचाई के लिए उपयोग करना, उत्तराख्ंड के पारंपरिक जलस्रोतों नौले-धारे, चाल खाल को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जिवित करना, घरों की छतों पर सोलर रूफ टाप सिस्टम लगाना है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।