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वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की धीमी प्रगति देख प्रयागराज के मंडलायुक्त नाराज, अनुपस्थित AE के खिलाफ की कार्रवाई

By Gyanendra Singh Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 29 Aug 2026 03:18 PM (IST)

मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने प्रयागराज के नैनी में निर्माणाधीन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई और ...और पढ़ें

प्रयागराज केनैनी स्थित निर्माणाधीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करते मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. व अन्य अधिकारी। सौ. सूचना विभाग

प्रयागराज केनैनी स्थित निर्माणाधीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करते मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. व अन्य अधिकारी। सौ. सूचना विभाग

HighLights

  1. परियोजना की अपेक्षित 60% के सापेक्ष सिर्फ 20-25 प्रतिशत प्रगति पर नाखुश

  2. एसटीपी का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश, 10 नए वार्डों में पेयजल आपूर्ति होगी

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। वर्ष 2021 में नगर निगम के विस्तारित क्षेत्र में शामिल किए गए नैनी के 10 नए वार्डों में पेयजल आपूर्ति के लिए ‘वाटर सप्लाई स्कीम फार नैनी एक्सटेंडेड एरिया’ के अंतर्गत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा है। निर्माणाधीन प्लांट का  निरीक्षण मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने शनिवार को किया। नैनी के विस्तारित क्षेत्र के 10 नए वार्डों में पेयजल आपूर्ति के लिए 273 करोड़ रुपये की लागत से वॉटर सप्लाई स्कीम के अंतर्गत निर्माणाधीन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा है। 

परियोजना की अपेक्षित 60 प्रतिशत के सापेक्ष मात्र 20-25 प्रतिशत प्रगति एवं साइट पर श्रमिकों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए मंडलायुक्त ने अनुपस्थित एई रबन गंगवार के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि एवं स्थानांतरण की संस्तुति शासन को भेजने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने निर्माणाधीन 50 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का 77 प्रतिशत कार्य पूर्ण पाया गया तथा शेष कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त के साथ जल निगम (नगरीय) के संबंधित अधिकारी भी मौजूद थे। 

निरीक्षण के प्रारंभ में अधिकारियों ने परियोजना का लेआउट प्रस्तुत करते हुए बताया कि यमुना से प्रस्तावित इनटेक वेल्स के माध्यम से पानी पाइपलाइन द्वारा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाएगा, जहां उसका उपचार किया जाएगा। इसके पश्चात उपचारित जल की आपूर्ति नैनी के विस्तारित क्षेत्र के 10 वार्डों में की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान मौके पर एक भी श्रमिक उपस्थित नहीं मिला। श्रमिकों की उपस्थिति से संबंधित अटेंडेंस रजिस्टर भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका। संबंधित एई रबन गंगवार के अवकाश पर होने की जानकारी दी गई। उनके स्थान पर उपस्थित एई भी परियोजना की प्रगति एवं श्रमिकों की अनुपस्थिति के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। पूछताछ में बताया गया कि रक्षाबंधन के अवकाश के कारण श्रमिक अपने घर गए हैं।

परियोजना की समीक्षा में अब तक 20-25 प्रतिशत कार्य पूर्ण पाया गया, जबकि इस अवधि तक लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो जाना अपेक्षित था। परियोजना का कार्य 18 जुलाई 2024 को अवार्ड किया गया था तथा इसे जुलाई 2027 तक पूर्ण किया जाना निर्धारित है।

एक्सईएन अमित राज ने बताया कि कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुगलिया लिमिटेड, राजस्थान को कार्य की धीमी एवं असंतोषजनक प्रगति के कारण उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के मुख्य अभियंता (परचेज) स्तर से 17 जून 2026 को पहले ही डिबार किया जा चुका है। कार्य की धीमी प्रगति एवं प्रभावी पर्यवेक्षण के अभाव पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मंडलायुक्त ने अनुपस्थित एई रबन गंगवार के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि एवं स्थानांतरण की संस्तुति शासन को भेजने के निर्देश दिए।

मंडलायुक्त ने यमुना नदी से पानी लेने के लिए प्रस्तावित इनटेक वेल्स की स्थिति की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि इनका निर्माण अभी प्रारंभ नहीं हुआ है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की अनुमति लंबित है, जबकि सिंचाई विभाग से अनुमति प्राप्त हो चुकी है। इस पर मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी, प्रयागराज को आवश्यक समन्वय करते हुए लंबित अनुमति शीघ्र प्राप्त करने तथा इनटेक वेल्स का निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए।

इसी क्रम में मंडलायुक्त ने प्रयागराज सीवरेज डिस्ट्रिक्ट-ए, नैनी परियोजना के अंतर्गत लगभग ₹186 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 50 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी का भी निरीक्षण किया। यहां लगभग 77 प्रतिशत कार्य पूर्ण पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना को 3 जुलाई 2026 तक पूर्ण किया जाना था, लेकिन कार्य में विलंब के कारण अब दिसंबर 2026 तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना प्रबंधक सुरेंद्र सिंह परमार ने विलंब का कारण बताते हुए अवगत कराया कि गत वर्ष अत्यधिक बाढ़ के कारण पूरा परियोजना क्षेत्र जलमग्न हो गया था, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।

एसटीपी में स्लज वाटर का उपचार कर 30 बीओडी से कम मानक वाला उपचारित जल निर्धारित एनजीटी मानकों के अनुरूप डिस्चार्ज किया जाएगा। परियोजना के पूर्ण होने से प्रयागराज जनपद के अन्य एसटीपी पर वर्तमान में पड़ रहे अतिरिक्त भार को कम करने में भी मदद मिलेगी। मंडलायुक्त ने दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग, कार्य में तेजी तथा निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता के साथ परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

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