मुश्किल हालात से लड़कर देवकी देवी ने बढ़ाई महिलाओं की गरिमा
विपरीत परिस्थितियों में भी देवकी देवी ने हार नहीं मानी और पर्वतीय क्षेत्र की विषम भौगोलिक स्थिति में भी अपनी एमए तक की पढ़ाई पूरी की।
हल्द्वानी, सतेंद्र डंडरियाल : विपरीत परिस्थितियों में भी देवकी देवी ने हार नहीं मानी और पर्वतीय क्षेत्र की विषम भौगोलिक स्थिति में भी अपनी एमए तक की पढ़ाई पूरी की। विवाह के बाद भी जब आर्थिक हालत नहीं सुधरे तो उन्होंने स्वयं गृहस्थी की कमान संभाली और घर पर ही लकड़ी के चूल्हे पर मडुवे की नमकीन और बिस्किट बनाने का काम शुरू किया। जिसकी बदौलत उन्होंने अपने चार बेटों को पीएचडी करवाई। देवकी आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरणा देने का काम कर रही हैं।
मूल रूप से पिथौरागढ़ की रहने वाली देवकी देवी ने उच्च शिक्षित होने के बाद भी आत्मनिर्भर बनना ज्यादा बेहतर समझा। उनका मानना है कि वह चाहती तो उन्हें नौकरी आसानी से मिल जाती, लेकिन तब वह उन सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा नहीं दे पाती, जो किसी कारण से उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर सकी। बताती हैं कि उन्होंने बहुत छोटे स्तर से घर के चूल्हे पर नमकीन बनाने का काम शुरू किया और उसे लोगों को बेचा। इस काम में उनके पति ओम प्रकाश जोशी और परिवार के सदस्यों ने भी हाथ बंटाया। उनके काम को देखते हुए वर्ष 2004 में उन्हें नेशनल माइक्रो इंटरपे्रनियोरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2008 में नेशनल प्रोडक्टिविटी अवार्ड मिला। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने भी उन्हें तीलू रौंतेली पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
अपनी क्षमताओं पर करें विश्वास
देवकी देवी मानती हैं कि महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। क्योंकि आमतौर पर आज भी पहाड़ के दूरदराज के इलाकों में महिलाओं की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। जिस कारण महिलाएं यह मान बैठती हैं कि वह शिक्षित नहीं हैं। इसलिए उन्हें किसी काम को शुरू करने में दिक्कतें आएंगी, लेकिन ऐसा नहीं है। महिलाएं अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें। उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की, लेकिन इसके बावजूद स्वयं अपना काम शुरू किया। जिससे समाज में उनका मान बढ़ा और आज वह सैकड़ों महिलाओं को प्रेरणा दे रही हैं।
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