देहरादून के चाय बागानों की भूमि परिवर्तन पर हाई कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार से मांगी जानकारी
नैनीताल हाई कोर्ट ने देहरादून के चाय बागानों की भूमि का स्वरूप बदलने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार और याचिकाकर्ता से चाय विकास बोर्ड की अनुमति और 1953 के टी एक्ट के अनुपालन पर जानकारी मांगी है। याचिका में कहा गया है कि चाय बागान क्षेत्र में अन्य कृषि कार्य से बागानों का अस्तित्व खतरे में है इसे टी स्टेट की धरोहर के रूप में विकसित करें।

जासं, नैनीताल। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से देहरादून की मशहूर चाय बागानों की भूमि का स्वरूप बदलकर उसे गन्ना, खीरा, तरबूज उगाए जाने के लिए दिए जाने के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार व याचिकाकर्ता से पूछा है कि क्या इसके लिए चाय विकास बोर्ड की अनुमति ली गई है, या नहीं।
1953 के टी एक्ट का अनुपालन किया गया है या नहीं? इसके बारे में दो सप्ताह में जानकारी देने को कहा है। अगली सुनवाई को दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक कुमार मेहरा की खंडपीठ में देहरादून के देवानंद की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
याचिका में कहा गया है कि देहरादून के विकास नगर क्षेत्र टी बगान के लिए आरक्षित क्षेत्र था। इस क्षेत्र में इसके अलावा कोई कृषि कार्य करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन जब से इस भूमि का चाय के अलावा अन्य मौसमी कृषि के लिए किया जा रहा है, तब से बागानों का अस्तित्व खतरे में आ गया है।
याचिका में राज्य सरकार से इसे टी स्टेट की धरोहर में ही विकसित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की याचना की गई है।
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