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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 29, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के केस में एम्‍स दिल्‍ली के निदेशक व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Sat, 29 Jun 2019 01:54 PM (IST)Updated: Sun, 30 Jun 2019 09:56 AM (IST)

हाईकोर्ट ने चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 50 हजार जुर्माना अदा नहीं करने पर जारी किया अवमानना नोटिस।

आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के केस में एम्‍स दिल्‍ली के निदेशक व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस
आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के केस में एम्‍स दिल्‍ली के निदेशक व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस

नैनीताल, जेएनएन : हाईकोर्ट ने चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 50 हजार जुर्माना अदा नहीं करने पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन को अवमानना नोटिस जारी कर 26 जुलाई तक जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाय।

आइएफएस संजीव ने कैट की कोर्ट में दो प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। एक में उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी चरित्र पंजिका में किए गए जीरो अंकन मामले में दिया हलफनामा झूठा है। संजीव ने इस मामले में आपराधिक केस चलाने का आदेश पारित करने की फरियाद की है, जबकि दूसरे में उन्होंने एम्स दिल्ली में घपलों का उल्लेख किया है। साथ ही कहा कि इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। संजीव के अनुसार 2014 में उनके द्वारा एम्स में अनियमितता के 13 मामले पकड़े। जिसके बाद ही संजीव को एम्स से हटा दिया गया। अब कैट की कोर्ट ने दोनों मामलों में जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए हैं। हाईकोर्ट ने पिछले साल संजीव की एसीआर में जीरो अंकन को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए 25 हजार जुर्माना लगा दिया। इस आदेश को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी तो सुप्रीम कोर्ट ने ना केवल हाईकोर्ट का आदेश को सही ठहराया बल्कि जुर्माना 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया। इसके बाद संजीव द्वारा 26 जून को हाईकोर्ट  में अवमानना याचिका दायर की गई। न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद एम्स निदेशक व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया।

इस तरह चली अब तक की कार्रवाई
आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के चरित्र पंजिका पर जीरो अंकन का मामला कैट में विचाराधीन है। कैट चेयरमैन संजीव के केस को दुर्लभ श्रेणी का बता चुके हैं। साथ ही वादी को दूसरे सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने व रजिस्ट्रार को उन्हें केस से संबंधित फाइल लौटाने के निर्देश हाल में दे चुके हैं। पिछले साल जुलाई में कैट चेयरमैन न्यायमूर्ति एल. नरसिम्हन रेड्डी ने मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संजीव के सीआर से संंबंधित नैनीताल बेंच में चल रही सुनवाई को छह माह के लिए स्थगित कर दिया था। 21 अगस्त को नैनीताल हाई कोर्ट ने आदेश को रद करने के साथ ही केंद्र सरकार पर 25 हजार जुर्माना लगा दिया था। एम्स दिल्ली ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। सर्वोच्च न्यायालय ने नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए केंद्र पर 25 हजार जुर्माना और लगा दिया था। 20 फरवरी को हाई कोर्ट ने कैट चेयरमैन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के खिलाफ जस्टिस रेड्डी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना नोटिस पर तीन माह के लिए रोक लगा दी। 29 मार्च को जस्टिस रेड्डी ने खुद को इस मामले से अलग करने का फैसला किया।

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