उत्तराखंड की आशाएं और चुनौतियां विषय पर हल्द्वानी में सीएम धामी करेंगे जागरण विमर्श का उद्घाटन
हल्द्वानी में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित 'जागरण विमर्श' में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड की आशाओं और चुनौतियों पर मंथन ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। देवभूमि में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने विकास की कई मंजिलें तय की हैं। पर्यटन, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, शहरीकरण और पर्यावरण को लेकर योजनाएं बनी हैं और साकार भी हो रही हैं, लेकिन अभी चुनौतियां बनी हुई हैं।
राज्य की इन्हीं संभावनाओं का खाका खींचने के लिए दैनिक जागरण की ओर से ‘उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां’ विषय पर जागरण विमर्श का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे।
दैनिक जागरण का यह मंच केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के विकास की मौजूदा स्थिति, भविष्य की संभावनाओं और नीतिगत चुनौतियों पर विशेषज्ञों और नीति-निर्धारकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगा।
खास बात यह है कि शुक्रवार को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक नैनीताल रोड स्थित होटल आइटीसी फार्च्यून में आयोजित इस जागरण विमर्श के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से प्रदेश की प्रगति, विकास की प्राथमिकताओं और उत्तराखंड के भविष्य की संभावनाओं पर सीधे संवाद भी करेंगे।
स्वास्थ्य व मौजूदा ढांचा और संभावनाएं
राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश में छह मेडिकल कालेज खुल गए हैं। एम्स ऋषिकेश के बाद किच्छा में एम्स सेटेलाइट सेंटर भी खुलने जा रहा है। इसके बावजूद विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं आज भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
मैदानी क्षेत्रों में अस्पतालों का दबाव बढ़ रहा है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, जांच सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता अभी भी महत्वपूर्ण विषय है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर संभावनाओं को लेकर स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल संवाद करेंगे।
रोजगार की संभावनाएं तलाशने पर होगा संवाद
राज्य में रोजगार की संभावनाओं को लेकर सरकार लगातार काम कर रही है। सिडकुल जैसे उद्योग हैं और लघु, सूक्ष्म व मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड के सामने विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर संभावनाएं तलाशी जानी हैं।
जबकि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बड़े उद्योगों के साथ-साथ पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, आयुर्वेद, हस्तशिल्प, सूचना प्रौद्योगिकी और स्थानीय उत्पाद आधारित उद्यमों की संभावनाएं हैं। इस विषय पर आइआइटी रुड़की के भौतिक विभाग के प्रोफेसर अजय कुमार संवाद करेंगे।
नियोजित विकास बनाम अनियोजित विकास
उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन सबसे गंभीर विषयों में है। सड़क, भवन, पर्यटन, बाजार और शहरी विस्तार जरूरी हैं, लेकिन सवाल यह है कि इनका नियोजन कितना वैज्ञानिक है।
अनियोजित निर्माण से यातायात, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, भूस्खलन और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। भविष्य में विकास का खाका किस तरह खींचा जा सकता है। इसी विषय पर संवाद करेंगे प्रमुख सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम।
पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने पर होगा विमर्श
पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन भविष्य का पर्यटन केवल अधिक पर्यटकों की संख्या तक सीमित नहीं रहना चाहिए। धार्मिक पर्यटन के साथ साहसिक, ग्रामीण, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं को व्यवस्थित किया जा सके।
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स्थानीय खान-पान, लोककला, लोकसंगीत, वास्तुकला और परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को बढ़ाना होगा। इन्हीं विषयों पर अपर सचिव पर्यटन अभिषेक रूहेला विमर्श करेंगे।
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