अभिषेक राज, हल्द्वानी : india-china tension सीमा पर चीन की साजिशें बढ़ती जा रही हैं। नेपाल को जरिया बनाकर वह नई चालें चल रहा है। उत्तराखंड की चीन से लगती सीमा पर नेपाली सेना की ड्रेस में चीनी दल के स्पॉट किए जाने के बाद से भारत की खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि ड्रैगन इस क्षेत्र में भी घेराबंदी के लिए सर्वे कर सकता है। दरअसल गर्बाधार से चीन सीमा लिपुलेख तक सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम तेज कर दिया है। 134 किमी लंबी सड़क पहाड़ काट कर तैयार करनी है। विपरीत हालात में निर्माण से नेपाल निर्माण निगम के विशेषज्ञों ने हाथ खड़े किए तो वन बेल्ट वन रोड परियोजना में जुटी चीनी कंपनी के विशेषज्ञों ने उत्तराखंड की पिथौरागढ़ सीमा से सटे क्षेत्र में नेपाली सेना का ड्रेस पहनकर निर्माण शुरू कर दिया। यहां उनकी संख्या अभी करीब 30 बताई जा रही है। उन्हें सेना की टुकड़ी के साथ हेलिकॉप्टर से निर्माण स्थल पर पहुंचाया गया है। बुधवार को सेना के हेलिकॉप्टर से ही निर्माण सामग्री भी मुहैया कराई गई। 

 

अभी चीन नेपाल में भैरहवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पोखरा एयरपोर्ट और काठमांडू के पशुपति इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार के साथ ही चार जल विद्युत परियोजनाओं पर काम कर रहा है। कोरोना काल में काम ठप पड़ा तो विशेषज्ञों को भारत से लगते सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए लगा दिया गया। खास बात यह रही कि सभी को नेपाली सेना की वर्दी में काम में लगाया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी दल की उपस्थिति से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हैं।   

 

नेपाल में चीन की दखल की बात करें तो वह रेलवे लाइन पर भी तेजी से काम कर रहा है। भारत से सटे प्रमुख मधेशी क्षेत्रों में उसने सर्वे भी शुरू करा दिया है। इस बीच भारतीय धारचूला-तवाघाट-गर्बाधार-लिपुलेख सड़क के समानान्तर नेपाल ने सदरमुकाम दार्चुला-सुनेसरा-घाटीबगड़- छांगरु-तिंकर चीन सीमा भज्यांग तक सड़क निर्माण की योजना तैयार की है। इसके पूर्व नेपाली सेना चार किमी बंद पैदल मार्ग खोलने में जुटी है।

 

नेपाल सरकार ने दार्चुला से चीन सीमा तक 134 किमी मार्ग निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। असल में नेपाल के दार्चुला से चीन सीमा भज्यांग की दूरी 134 किमी है। दार्चुला से सड़क निर्माण का कार्य कुछ वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ। नेपाल के सड़क निर्माण विभाग ने 47 किमी सड़क का काम पूरा कर दिया है। इस बीच बुधवार को सेना प्रमुख खुद निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंच गए। 

 

यहां नेपाली बीओपी प्रस्तावित : दुमलिंग, दार्चुला, लेकम, लाली, मल्लिकार्जुन, जौलजीबी

 

सामरिक रूप से अहम है मार्ग 

नेपाल जिस स्थान से पैदल मार्ग खोल रहा है वह भारत के बूंदी गांव के सामने काली नदी पार नेपाल में पड़ता है। वहां भी भारत के बूंदी गांव के बुदियालों की जमीन है।

 

ऐसे सामने आया मामला 

गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने विरोध दर्ज कराकर दार्चुला-टिंकर सड़क मार्ग पर काम शुरू कर दिया। इस बीच भारतीय क्षेत्र पालपा, लामारी, बूंदी और गब्रयांग के स्थानीय लोगों का भी वहां आना जाना रहा। निर्माण कार्य में लगे सैनिकों की बोलचाल और शारीरिक बनावट उन्हें चीनी लगी। धीरे-धीरे बात पूरे सीमावर्ती क्षेत्रों में फैल गई। इसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी गंभीरता से लिया।   

मेजर बोले चीन की चाल सफल नहीं होने देंगे

मेजर बीएस रौतेला (रिटायर्ड)  ने बताया कि हाल के दिनों में नेपाल में चीनी दखल तेजी से बढ़ा है। निर्माण कार्यों में चीनी कंपनियों का वहां वर्चस्व है। ताजा घटनाक्रम में नेपाल को आगे कर चीन अपनी चाल चल रहा है। हम पूरी तरह से तैयार हैं। चीन की चाल सफल नहीं होने दी जाएगी। 

 

छांगरू से कालापानी पर नजर रखेगी नेपाली सेना  

कैलास मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने के लिए गर्बाधार से लिपुलेख तक बनाई गई सड़क पर तकरार के बाद नेपाल ने कालापानी क्षेत्र में नजर रखने के लिए छांगरू में सशस्त्र बल की बीओपी शुरू कर दी है। यहां से सशस्त्र बल के साथ ही नेपाली सेना पूरे क्षेत्र पर नजर रखेगी। व्यवस्था का जायजा लेने के लिए ही बुधवार को पहली बार नेपाली सेनाध्यक्ष पूर्णचंद थापा और सशस्त्र प्रहरी बल के प्रमुख शैलेंद्र खनाल दार्चुला पहुंचे। नेपाली नक्शा विवाद के बाद पहली बार नेपाली सैन्य प्रमुख यहां के दौरे पर पहुंचे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, गर्बाधार-लिपुलेख मार्ग पर नजर रखने के लिए नेपाल अभी सुदूर पश्चिम में छह और बॉर्डर आउटपोस्ट बनाएगा। 

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