Chaitra Navratri 2022 : क्या है शीतला माता मंदिर के स्थापना की कहानी और यहां की मान्यता
मां शीतला माता का मंदिर हल्द्वानी से आठ किमी दूर रानीबाग नामक स्थान पर स्थित है। मां शीतला को चेचक जैसी विभिन्न बीमारियों की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। माता की महिमा को यहां पहुंचने वाले खुद महसूस भी करते हैं।

हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : हरे-भरे जंगल के बीच विराजित मां शीतला माता का मंदिर हल्द्वानी से आठ किमी दूर रानीबाग नामक स्थान पर स्थित है। शीतला मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग से 800 मीटर पैदल दूरी तय कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। वैसे तो यहां सालभर भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है। मगर नवरात्र में यहां विशेष आयोजन रहते हैं। भक्तों की लंबी कतार श्रद्धा को प्रकट करती है। माना जाता है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मंदिर की कहानी
भीमताल के पंडित अपने गांव में शीतला माता का मंदिर बनाने के लिए बनारस से मूर्ति ला रहे थे। पैदल चलते उन्हें रात हो गई। रानीबाग के गुलाबघाटी में उन्होंने रात्रि विश्राम किया। कहा जाता है कि एक व्यक्ति ने इस जगह मां की स्थापना का सपना देखा और अपने साथी को बताया। साथियों को इस बात पर भरोसा नहीं हुआ। उन्होंने मूर्ति उठानी शुरू की, लेकिन मूर्ति को हिला नहीं सके। बाद में यहां मंदिर की स्थापना हुई।
मंदिर से जुड़ा महात्म्य
कुमाऊं में शीतला देवी के गिनती के मंदिर हैं। स्कंद पुराण में मुताबिक शीतला देवी का वाहन गर्दभ है। वह अपने हाथ में सूप, कलश, झाड़ू व नीम के पत्तों को धारण करती हैं। मां शीतला को चेचक जिसे चिकनपाक्स भी कहते हैं, जैसी विभिन्न बीमारियों की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। इनका प्रतीकात्मक महत्व है। सूप से हवा लगाई जाती है, झाडू से चिकन पाक्स को फोड़ा जाता है। नीम के पत्ते फोड़े को सडऩे नहीं देते।
पूरे साल पहुंचते हैं भक्त
पुजारी शीतला माता मंदिर हरीश चंद्र पाठक ने बताया कि शीतला मंदिर माता का पावन धाम है। यहां सालभर भक्त आते हैं और अपनी मनौती के लिए प्रार्थना करते हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना को माता शीतला अवश्य पूरा करती हैं। माता की महिमा को यहां पहुंचने वाले खुद महसूस भी करते हैं।
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