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    आंख के तिरछेपन से घबराएं नहीं, कराएं इलाज

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 08 May 2017 01:00 AM (IST)

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : एक आंख सीधी और दूसरी आंख जब ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर होने लगती है, तो यह आंख

    आंख के तिरछेपन से घबराएं नहीं, कराएं इलाज

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : एक आंख सीधी और दूसरी आंख जब ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर होने लगती है, तो यह आंख का तिरछापन (स्कि्वन्ट) कहलाता है। बचपन से ही होने वाली इस बीमारी से कई बार आंख की रोशनी कम होने लगती है। साथ ही ऐसी आंखों वाले लोग खूबसूरती को लेकर भी मानसिक रूप से परेशान रहते हैं। डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन मल्होत्रा का कहना है कि आंख के तिरछेपन का इलाज है। अगर समय पर इलाज करा लिया जाए, तो इससे होने वाली कई तरह की तकलीफों से बचा जा सकता है। डॉ. मल्होत्रा रविवार को दैनिक जागरण के हैलो डॉक्टर प्रोग्राम में कुमाऊं के लोगों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने लोगों को आंखों की अन्य बीमारियों के बारे में भी सलाह दी। आप भी बातचीत पर आधारित सलाह का लाभ ले सकते हैं।

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    दिखने की समस्या को गंभीरता से लें

    एंबलाइओपिया यानी सुस्त आंख। बच्चे के आंख में तिरछापन है, तो मस्तिष्क उस आंख को निष्क्रिय कर देता है। कई बार उस आंख से देखना बंद हो जाता है। डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि ऐसा इसलिए होता है, ताकि चीजें दो-दो न दिखें। खूबसूरत दिखने के लिए भी इलाज कराया जा सकता है। इन लोगों में हीन भावना आ जाती है। इसलिए इस बीमारी का इलाज जरूरी है।

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    तिरछपेन का तीन तरह से इलाज

    तिरछेपन का इलाज तीन तरीके से है। बचपन में अगर दिक्कत है तो चश्मा लगाने की सलाह दी जाती है। चश्मा लगने के बाद कई बच्चों में तिरछापन खत्म हो जाता है। पैचिंग के जरिये भी है और ऑपरेशन से भी तिरछेपन का इलाज संभव है।

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    बढ़ रहा कंप्यूटर विजन सिंड्रेाम का खतरा

    कंप्यूटर, लैपटॉप व मोबाइल पर काम का प्रचलन बढ़ गया है। इस वजह से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या भी बढ़ गई है। लंबे समय तक स्क्रीन में देखने से आंखों में जलन, पानी आना और लालिमा की दिक्कत होने लगती है। डॉ. मल्होत्रा सलाह देते हैं कि इसके लिए रूल 20-20 का प्रयोग करें। यानी स्क्रीन में देखने के 20 मिनट बाद 20 सेकेंड के लिए आंखों से 20 फीट दूर की चीज देखते रहें।

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    आंखों में अपने मन से न डालें स्टीरॉयड

    इस समय आइ फ्लू का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोग बच्चों की आंखों में अपने मन से स्टीरॉयड दवाइयां डालने लगे हैं। इस दवा का लंबे समय तक प्रयोग घातक है। इससे काला मोतिया, सफेद मोतियाबिंद की समस्या होने लगती है।

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    इन लोगों ने किया फोन

    बीडी जोशी पिथौरागढ़, मो. नूर काशीपुर, चंद्र पाठक रामनगर, नरेश बिष्ट दिनेशपुर, राजकुमार काशीपुर, विनय जोशी पिथौरागढ़, मुकेश चम्पावत, मदन सिंह सितारगंज, हाशिम बरखेड़ा पांडे काशीपुर, राजीव अल्मोड़ा, चंद्रप्रकाश नैनीताल, रोजी मदान रुद्रपुर, ममता चम्पावत, सुरेश जोशी बागेश्वर, तारा प्रसाद डीडीहाट आदि ने फोन किया।