सर्वपितृ अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, पितरों के तर्पण को जुटेंगे श्रद्धालु
हरिद्वार में सर्वपितृ अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए जुटेंगे। वीकेंड और शनिश्चरी ...और पढ़ें

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HighLights
सर्वपितृ अमावस्या पर हरिद्वार में पितरों का तर्पण और श्राद्ध होगा।
वीकेंड और शनिश्चरी अमावस्या के कारण भारी भीड़ की उम्मीद है।
पुलिस ने सुरक्षा और यातायात के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
शैलेंद्र गोदियाल जागरण, हरिद्वार। पितरों की आत्मशांति और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए विशेष माने जाने वाले सर्वपितृ अमावस्या पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। शनिवार को पड़ रही सर्वपितृ अमावस्या और वीकेंड का संयोग होने से गंगा घाटों के साथ ही नारायणी शिला पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है।
श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करेंगे। संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने नारायणी शिला सहित प्रमुख घाटों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या को महालया अमावस्या भी कहा जाता है।
यह दिन उन पितरों के लिए विशेष माना जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर उनका श्राद्ध नहीं किया जा सका। पितृ पक्ष के अंतिम दिन श्रद्धालु अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं।
अमावस्या तिथि के साथ ही पितृ पक्ष का समापन हो जाता है। नारायणी शिला के मुख्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, इस बार सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को पड़ रही है, इसलिए इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है।
शनिवार और अमावस्या के इस संयोग में पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है। इस दिन शनि देव की आराधना और जरूरतमंदों को दान करने की भी परंपरा है।
पंचबलि का भी है विशेष महत्व
श्राद्ध कर्म में पंचबलि की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। इसके तहत भोजन के पांच भाग निकालकर गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के निमित्त अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पंचबलि के माध्यम से जीव-जंतुओं और देव शक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। इसे पितरों की प्रसन्नता और परिवार की सुख-शांति से भी जोड़कर देखा जाता है।
शाम को दीपदान से पितरों को विदाई
सर्वपितृ अमावस्या की शाम दीपदान की भी परंपरा है। श्रद्धालु घर के मुख्य द्वार या पीपल के पेड़ के समीप दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष के अंतिम दिन दीपदान के माध्यम से पितरों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की जाती है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर 2026 की रात 9 बजकर 35 मिनट से शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा।
हरिद्वार में सर्वपितृ अमावस्या पर नारायणी शिला, हरकी पैड़ी और अन्य गंगा घाटों पर पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सर्वपितृ अमावस्या और वीकेंड होने के कारण इस बार भीड़ और अधिक रहने का अनुमान है।
इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रमुख घाटों तथा नारायणी शिला क्षेत्र में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
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