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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 05, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आइआइटी रुड़की ने विकसित किया एडवांस डिफॉगिंग सिस्टम, ड्राइविंग में होगा मददगार साबित

By Sunil NegiEdited By:
Published: Sun, 05 Jul 2020 11:10 AM (IST)

आइआइटी रुड़की की शोध टीम ने एक ऐसा एडवांस डिफॉगिंग सिस्टम तैयार किया है जो ड्राइविंग में मददगार तो साबित ...और पढ़ें

आइआइटी रुड़की ने विकसित किया एडवांस डिफॉगिंग सिस्टम, ड्राइविंग में होगा मददगार साबित
आइआइटी रुड़की ने विकसित किया एडवांस डिफॉगिंग सिस्टम, ड्राइविंग में होगा मददगार साबित

रुड़की, जेएनएन। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की की शोध टीम ने एक ऐसा एडवांस डिफॉगिंग सिस्टम तैयार किया है, जो बेहतर ड्राइविंग में मददगार तो साबित होगा ही, दृश्यता के अभाव में दुर्घटनाओं का जोखिम भी कम करेगा। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पर इस शोध को इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्टिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (आइईईई) के जर्नल ने प्रकाशित किया है।

आइआइटी रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर ब्रजेश कुमार कौशिक ने बताया कि कोहरे की उपस्थिति दृश्यता की दूरी को तेजी से कम कर देती है। जिससे ड्राइविंग के लिए खतरनाक स्थितियां बन जाती हैं। चालक कोहरे की स्थिति में यात्रा करते समय दृश्यता की दूरी को पार कर जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन, लेन डिपार्चर वार्निंग और टक्कर चेतावनी में क्लियर इमेज डेटा की आवश्यकता होती है। बताया कि इस शोध का उद्देश्य रियल टाइम डिफॉगिंग के लिए एक सिस्टम डिजाइन करना था, जो फॉगी फ्रेम से इनपुट लेकर एक क्लियर इमेज स्ट्रीम उत्पन्न करता हो। 

इसके अलावा फ्रेम लैग या ड्रॉप से बचने के लिए परिवहन में एक हाई फ्रेम रेट आवश्यक है। यदि कोई वाहन 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रहा है और पांच फ्रेम प्रति सेकेंड ऑटोमेटिक ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम (एडीएएस) को अपनाया जाता है तो सिस्टम रिएक्ट्स (प्रोसेसिंग या थिंकिंग टाइम) से पहले वाहन 21 फीट की दूरी तय करेगा।  जबकि 60 फ्रेम प्रति सेकंड एडीएएस के लिए रिएक्शन डिस्टेंस कम होकर दो फीट रह जाती है। बताया कि हाई रेजोल्यूशन पर एक हाई फ्रेम रेट प्राप्त करने के लिए डेडिकेटेड वीडियो डिफॉगिंग हार्डवेयर की जरूरत होती है। हालांकि, रियल टाइम प्रोसेसिंग के लिए एक एल्गोरिथ्म इफेक्टिव मैपिंग नॉन ट्रिवियल है। 

बताया कि एक्सपोनेंशियल फंक्शन, फ्लोटिंग प्वाइंट मल्टीप्लिकेशन व डिवीजन, फुल इमेज बफर, प्रोसेसर और डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (डीआरएएम) के बीच डेटा ट्रांजेक्शन जैसे ऑपरेशन प्रदर्शन को खराब करते हैं। इन चुनौतियों को खत्म करने के लिए उन्होंने रियल-टाइम वीडियो डिफॉगिंग के लिए एक कुशल मैथड और आर्किटेक्चर विकसित किया। यह पावर और मेमोरी की जरूरतों को कम करते हुए हाई परफॉरमेंस और इमेज रेस्टरेशन क्वालिटी प्राप्त करने के लिए को-डिजाइन किए गए हैं।

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आइआइटी रुड़की के निदेशक प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि कोहरे के चलते खराब दृश्यता के कारण वाहनों के टकराने से प्रति वर्ष कई बड़े हादसे होते हैं। यह एडवांस डिफॉगिंग सिस्टम चालकों को रियल टाइम इन्फॉर्मेशन देने के साथ ही कोहरे के कारण सड़क और रेल दुर्घटना के जोखिम को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने इस शोध के लिए प्रोफेसर ब्रजेश कुमार कौशिक, राहुल कुमार और कंप्यूटर साइंस विभाग से प्रो. बालासुब्रमण्यम रमन को बधाई दी।

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