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    निर्दलीय प्रत्याशी उमेश ने ढहाया चैंपियन का किला

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 10 Mar 2022 09:26 PM (IST)

    खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया है। इस सीट पर कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। लेकिन वह इसे बचा नहीं सके।

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    निर्दलीय प्रत्याशी उमेश ने ढहाया चैंपियन का किला

    संवाद सूत्र, लक्सर : खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया है। इस सीट पर कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। लेकिन, वह इसे बचा नहीं सके। चैंपियन ने इस बार अपनी पत्नी कुंवरानी देवयानी को अपनी जगह चुनाव मैदान में उतारा था। देवयानी तीसरे स्थान पर रहीं। पत्नी को टिकट दिलवाकर किला बचाने का उनका दांव फेल रहा और उनका मजबूत किला ढह गया। निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के रविद्र पनियाला और चार बार के विधायक रहे कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की पत्नी रानी देवयानी सिंह को पराजित कर बड़ी जीत दर्ज की है। आम जनता से सीधे जुड़ाव ने उनकी जीत की राह को आसान बनाया है। उमेश कुमार ने खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय ताल ठोकी थी, जबकि भाजपा ने यहां से चार बार के विधायक रहे कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की पत्नी रानी देवयानी सिंह तथा बसपा ने रविद्र सिंह पनियाला तथा कांग्रेस ने सुभाष चौधरी को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन, निर्दलीय चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे उमेश कुमार ने कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के मजबूत किले को ध्वस्त कर अपने प्रतिद्वंदी बसपा के रविद्र पनियाला को बड़ी शिकस्त दी है। इस बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार नजर आ रहे थे। लेकिन, मुख्य मुकाबला शुरू से ही बसपा प्रत्याशी रविद्र पनियाला व निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार के बीच दिखाई दे रहा था। उमेश कुमार की जीत के पीछे उनका चुनाव से करीब तीन माह पूर्व क्षेत्र में अपने पैर जमाने तथा आम जनता से सीधे जुड़ाव को एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। उमेश कुमार ने जिस तरह तीन महीने तक दिन रात एक कर क्षेत्र के व्यक्तियों के बीच में रहकर उनके सुख दुख में भागीदारी निभाने एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य किया गया। जिनमें कई ऐसे कार्य भी शामिल रहे हैं। जो पिछले बीस वर्षों में कोई भी जनप्रतिनिधि एवं राजनीतिक दल तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने नहीं किए थे। इसका भी एक सीधा असर उनकी जीत पर पड़ा है। इस सबके अलावा वह क्षेत्र के उच्च वर्ग के साथ-साथ मध्यम एवं निम्न वर्ग के व्यक्तियों को साधने में पूरी तरह सफल रहे हैं। जिसका सीधा लाभ भी उन्हें मिला है। जिसके चलते जीत का सेहरा उनके सिर बंधा है।

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