जागरण संवाददाता, हरिद्वार : प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देशों का पालन कराने के लिए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने सिडकुल के उद्योगों को नोटिस जारी किया है।

जिसमें पीसीबी में एक्सटेंडेट प्रोड्यूसर्स रेस्पांसिब्लिटी (ईपीआर) एक्शन प्लान जमा कराने वाली पांच इकाईयों को छोड़कर अन्य इकाईयों की संचालन सहमति तत्काल प्रभाव से निरस्त की गयी है। इधर नोटिस पर संज्ञान लेते हुए इंडस्ट्रीज एसोसिएशन हरिद्वार ने मंगलवार को विस्तार से चर्चा कर कार्ययोजना तैयार की।

ईपीआर एक्शन प्लान जमा कराने की भी अनिवार्यता

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अंतर्गत पैकेजिंग प्लास्टिक का उपयोग करने वाले उद्योगों को ईपीआर के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से विकसित पोर्टल में पंजीकरण कराने को अनिवार्य किया गया है। साथ ही ईपीआर एक्शन प्लान जमा कराने की भी अनिवार्यता है।

उत्तराखंड पीसीबी के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि दो दिसंबर तक स्टेट पीसीबी की ओर से कुल 75 और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से कुल 1654 इकाईयों की ओर से पंजीकरण कराया गया है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर, पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड समेत पांच इकाईयों की ओर से ईपीआर एक्शन प्लान स्टेट पीसीबी में जमा किया गया है। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 और उच्च न्यायालय उत्तराखंड के पीआइएल में पारित आदेशों का अनुपालन न किए जाने के कारण पांच इकाईयों को छोड़कर अन्य इकाईयों का संचालन सहमति तत्काल प्रभाव से निरस्त की गयी है।

आदेश में बताया गया है कि बिना संचालनार्थ सहमति प्राप्त किए इकाईयों का संचालन विधि विरुद्ध और उच्च न्यायालय उत्तराखंड के आदेशों की अवमानना होगी। इधर बोर्ड के नोटिस पर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन हरिद्वार ने संज्ञान लिया है।

मंगलवार को इस पर विस्तारपूर्वक चर्चा कर कार्ययोजना भी बनायी गयी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज गौतम ने बताया कि विभाग से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की जाएगी कि किन उद्योगों पर यह लागू है और किन पर नहीं।

आवश्यकतानुसार सरकार के साथ भी बैठक कर उद्योगों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा जाएगा। उद्योग हित और हजारों लोगों के रोजगार को देखते हुए यदि हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी तो इससे भी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पीछे नहीं हटेगी।

हरिद्वार में अवैध ईट भट्ठों के संचालन पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा

नैनीताल हाई कोर्ट ने हरिद्वार के तहसील रुड़की में चल रहे अवैध ईट भट्टों के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हरिद्वार नारसन निवासी मनोज कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा गया है कि पूरे जिले में से रुड़की तहसील में ही 90 प्रतिशत ईंट भट्टे हैं।

इनमें से कई के पास पीसीबी की अनुमति भी नही है। बिना अनुमति के चल रहे इन भट्टों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन भी किया जा रहा है।

इस मामले की जांच कराई जाए। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी चार नबंबर 2022 को जिलाधिकारी व पीसीबी को आदेश दिए थे कि इनकी जांच कर रिपोर्ट पेश करें। अभी तक जांच रिपोर्ट पेश नहीं की गई।

Edited By: Nirmala Bohra

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