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    1938 के बाद पहली बार 11 साल के अंतराल में पड़ा कुंभ, बन रहा वैसा ही योग, जैसे योग में बरसा था अमृत

    By Raksha PanthriEdited By:
    Updated: Wed, 14 Apr 2021 10:20 AM (IST)

    Haridwar Kumbh Mela 2021 वर्ष 1938 के बाद पहली बार 11 साल के अंतराल में पड़े रहे कुंभ में आज फिर वैसा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है जैसा समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को पाने के लिए देव-दानव संघर्ष के दौरान बना होगा।

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    1938 के बाद पहली बार 11 साल के अंतराल में पड़ा कुंभ।

    जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Haridwar Kumbh Mela 2021 वर्ष 1938 के बाद पहली बार 11 साल के अंतराल में पड़े रहे कुंभ में आज फिर वैसा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है, जैसा समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को पाने के लिए देव-दानव संघर्ष के दौरान बना होगा, जब कलश से छलकीं अमृत की बूंदें हरिद्वार में बह रही पतित पावनी गंगा में गिरी थीं। जब अमृत कलश छलका, तब सूर्य व चंद्र मेष राशि और गुरु कुंभ राशि में विचरण कर रहे थे। शास्त्रों के अनुसार इस दिन से खरमास का समापन तो होता ही है, मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है। मेष संक्रांति पर पड़ने वाले स्नान को हरिद्वार कुंभ का मुख्य स्नान माना गया है।

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    ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज कहते हैं कि संक्रांति का मतलब संचरण करना है। प्रकृति के एक बदलाव का रूप संक्रांति भी है। इस अवसर पर सूर्य का राशि परिवर्तन होना सौरवर्ष के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बदलाव का मौसम पर भी सीधा असर पड़ता है। कहने का मतलब मेष संक्रांति का दिन सृष्टि की हरेक रचना पर अपना प्रभाव छोड़ता है। इसलिए इस दिन सूर्य आराधना का विशिष्ट महत्व माना गया है। 

    कहते हैं कि मेष संक्रांति पर गंगा आदि नदियों में किया गया स्नान सहस्नों यज्ञों का फल देने वाला है। डॉ. सुशांत राज बताते हैं कि मेष संक्रांति का पुण्यकाल सुबह पांच बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक यानी छह घंटे 25 मिनट तक रहेगा, जबकि महा पुण्यकाल की अवधि दो घंटे आठ मिनट है। महा पुण्यकाल सुबह पांच बजकर 57 मिनट से सुबह आठ बजकर पांच मिनट तक रहेगा।

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