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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संत की कलम से: दिव्य-भव्य और पारंपरिक स्वरूप में होगा कुंभ मेला- कोठारी महंत दामोदार दास

By Raksha PanthriEdited By:
Published: Mon, 11 Jan 2021 10:31 AM (IST)

Haridwar Kumbh 2021 कोरोना वायरस संक्रमण के साए के बीच कुंभ मेले की तैयारियां चल रही हैं। मेला दिव्य और ...और पढ़ें

कोठारी महंत दामोदार दास, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन।
कोठारी महंत दामोदार दास, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन।

Haridwar Kumbh 2021 कोरोना वायरस संक्रमण के साए के बीच कुंभ मेले की तैयारियां चल रही हैं। मेला दिव्य और भव्य ही नहीं, बल्कि पारंपरिक स्वरूप में भी होगा। अखाड़े भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। कुंभ के लिए विशेष योग 12 वर्षों की बजाए 11 वर्ष में पड़ रहा है। यही वजह है कि इस बार यह ग्यारह वर्ष में ही आयोजित हो रहा है। 

11 मार्च को होने वाले पहले शाही स्नान को लेकर संत महात्माओं से लेकर आम श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। कुंभ हरिद्वार के अलावा प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में होता है। समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूंदे इन चार स्थानों पर ही गिरी थीं, इसलिए इन स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। मनुष्य को यदि परमात्मा की प्राप्ति करनी है और अपने जीवन को भवसागर से पार लगाना है तो कुंभ मेले के दौरान पतित पावनी मां गंगा में स्नान कर स्वयं को पुण्य का भागी बनाएं। 

कुंभ मेले के दौरान मां गंगा में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पापों का शमन होता है और व्यक्ति को सहस्त्र गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यह आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा पर्व है। कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रत्येक कुंभ मेले की तरह आसन्न कुंभ मेला भी संत महापुरुषों के आशीर्वाद से सकुशल संपन्न होगा। 

[कोठारी महंत दामोदार दास, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन] 

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