जागरण संवाददाता, हरिद्वार : भारत सरकार के मुख्य कृषि विज्ञान सलाहकार राजीव चावला ने पतंजलि की ओर से कृषि क्षेत्र में किए गए नूतन और वैज्ञानिक प्रयोगों पर प्रसन्नता व्यक्त की। कहा कि किसानों की समस्या और उसके लिए पतंजलि की ओर से किए गए समाधान के प्रयास देश में कृषि विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगें। इसमें उत्तराखंड सरकार और हरिद्वार प्रशासन की भूमिका भी सराहनीय है।

मंगलवार को पतंजलि जैविक अनुसंधान संस्थान की ओर से डिजिटल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में किए गए कार्यों के मूल्यांकन को लेकर आयोजित बैठक में भारत सरकार के मुख्य कृषि विज्ञान सलाहकार राजीव चावला ने यह बात कही।

इस मौके पर कृषि अनुसंधान में पतंजलि की ओर से लिखित दस हजार से अधिक पृष्ठों का अनुसंधान संग्रह भी टीम के सम्मुख प्रस्तुत किया गया। इस सरकारी परियोजना में पतंजलि जैविक अनुसंधान संस्थान ने चार जिलों का चयन किया है। जिसमें हरिद्वार, उत्तर प्रदेश का वाराणसी, हमीरपुर और मध्यप्रदेश का मुरैना जिला शामिल हैं। इन जिलों के हर गांव के किसानों की आवश्यक जानकारी और डाटाबेस तैयार किया गया। जिसमें उसकी जमीन की उर्वरक क्षमता को मापने के साथ-साथ, उस जमीन पर कौन सी फसल कितने क्षेत्र में उपज रही है और उसे कैसे बढ़ाया जा सकता है उसे भी सेटेलाइट के माध्यम से देखा जा सकेगा। इसी क्रम में इस कार्य प्रणाली से किसानों को यह भी ज्ञात हो जाएगा कि उसने कितना बीज अपनी जमीन में लगाया था और कितनी फसल तैयार हुई। इसके लिए हरित क्रांति और अन्नदाता मोबाइल एप भी बनाया गया है जो किसानों को दोबारा जैविक खेती की ओर अग्रसर करने के लिए प्रेरित करता है। आज किसान अधिक उपज की प्राप्ति के लिए वह अपने खेतों में अनावश्यक फर्टिलाइजर का उपयोग कर रहा है। जिस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति का दोहन हो रहा है। बैठक में आचार्य बालकृष्ण, मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार सौरभ गहरवार, मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी, कविद्र, पवन, डा. केएन शर्मा, निशांत सिरोही, ऋषि आर्य, डा. वेदप्रिया आर्य आदि मौजूद रहे।

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