जागरण संवाददाता, रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की में दिव्यसंपर्क आई-हब रुड़की फार डिवाइसेस मैटेरियल्स एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन अस्तित्व में आया है। इसका उद्देश्य साइबर-भौतिक प्रणालियों (सीपीएस) प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में कार्य करना और सीपीएस डोमेन में प्रौद्योगिकी नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसका नेतृत्व सीइओ के रूप में आइआइटी कानपुर के पूर्व छात्र मनीष आनंद करेंगे।

आइआइटी रुड़की और दिव्यसंपर्क आइआइटी रुड़की के निदेशक मंडल प्रोफेसर अजित के चतुर्वेदी ने बताया कि दिव्यसंपर्क साइबर-भौतिक प्रणालियों और संबद्ध प्रौद्योगिकियों के लिए एक समाधान प्रदाता के रूप में कार्य करेगा। यह ज्ञान के सृजन की सुविधा प्रदान करेगा। स्टार्टअप को प्रोत्साहित करेगा और आइआइटी रुड़की के साथ-साथ देश भर में सहयोग को बढ़ावा देगा। परियोजना निदेशक और दिव्यसंपर्क आइआइटी रुड़की के निदेशक मंडल सदस्य प्रो. सुदेब दासगुप्ता के अनुसार सीपीएस असल में आधुनिक तकनीकों का समुच्चय है। जो उद्योग 4.0 की चुनौतियों का सामना करने, एक अभिनव और उद्यमशील पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने की ओर उन्मुख है। यह पहल हमारे देश के भविष्य को आकार देने में मदद करेगी। जो गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों ²ष्टि से मूल्यांकन योग्य होगा। उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआइएच) की स्थापना नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (एन-एम आइसीपीएस) के तहत की गई है। लगभग 356 केंद्रीय प्रौद्योगिकियों के लिए एकीकृत समाधान के रूप में कार्यरत होना इसका उद्देश्य है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की ओर से वित्तीय रूप से पोषित, परियोजना की लागत अगले पांच वर्षों के लिए लगभग 135 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें से 27.25 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

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25 हाई-टेक हब में से दिव्यसंपर्क आई-हब एक

रुड़की: टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब आइआइटी रुड़की व विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की एक संयुक्त पहल है। सरकार के सहयोग से बनाए जा रहे 25 हाई-टेक हब में से दिव्यसंपर्क आई-हब एक है। टीआइएच, सीपीएस में अनुसंधान को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय महत्व के प्रोटोटाइप/उत्पादों को विकसित करने, मुख्य दक्षताओं और क्षमताओं को विकसित करके अगली पीढ़ी की डिजीटल प्रौद्योगिकियों की नींव के रूप में कार्य करेगा। टीआइएच फोकस और थ्रस्ट क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य अनुसंधान, आवास एवं शहरी मामले, नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार और अंतरिक्ष सम्मिलित होंगे।

Edited By: Jagran

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