हरिद्वार, जेएनएन। योग गुरु बाबा रामदेव का 25वां संन्यास दिवस संन्यास, दीक्षा और रामनवमी महोत्सव के रूप में मनाया गया। इस मौके पर बाबा रामदेव ने कहा कि हमें अपने पुरुषार्थ से ऐसा जीवन, ऐसा समाज, ऐसा राष्ट्र और ऐसा विश्व बनाना है, जो किसी भी प्रकार के आदि भौतिक, आदि दैविक, आध्यात्मिक ताप-संताप के साथ ही दुख-दरिद्रता से मुक्त हो। इस मौके पर डॉ. सोमदेव शास्त्री की पुस्तक 'वेदों का दिव्य संदेश' का विमोचन भी किया गया।   

बाबा रामदेव ने कहा कि भारत-नेपाल के संबंध पुरातन काल से हैं। श्रीराम का जन्म भारत में हुआ और माता सीता की जन्म स्थली नेपाल में है। कहा कि हमारा जीवन व चरित्र भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, योगेश्वर श्रीकृष्ण और ऋषियों की भांति पावन होना चाहिए। इसके लिए हमें योग का अनुशासन अपनाना होगा। तभी राम राज्य की स्थापना संभव है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि योग, वैदिक संस्कृति और अध्यात्म को पूरी दुनिया में पहुंचाने का कार्य पतंजलि कर रहा है। इस अर्वाचीन युग में भारतीय संस्कृति के मूल स्वरूप को बचाने का भगीरथ प्रयास महर्षि दयानंद ने किया था। उनकी परंपरा को जीवित रखने का कार्य महर्षि दयानंद का कोई शिष्य ही कर सकता है।   

गुरुदेव आचार्य प्रद्युम्न महाराज ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई आलंबन अवश्य होना चाहिए। शिष्य स्वयं को किसी एक गुरु को पूर्ण रूप से सौंप दे। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, राजस्थान के पूर्व लोकायुक्त एसएस कोठारी, दानवीर मेहता, आरके वर्मा आदि मौजूद रहे। 

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Posted By: Raksha Panthari

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