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हरिद्वार अर्धकुंभ 2027: गंगा सभा ने घोषित की प्रमुख स्नान और शाही स्नान की तिथियां

Published: Thu, 26 Mar 2026 10:57 PM (IST)

हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027 की तैयारियां जोरों पर हैं। श्री गंगा सभा ने 'गंगा पंचांग' जारी कर प्रमुख स्नान पर्वों ...और पढ़ें

स्नान पर्व पर इस तरह हरकी पैड़ी में उमड़ती है भीड़। जागरण आर्काइव

स्नान पर्व पर इस तरह हरकी पैड़ी में उमड़ती है भीड़। जागरण आर्काइव 

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शैलेंद्र गोदियाल, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में अर्धकुंभ पर्व 2027 को लेकर तैयारियां निरंतर चल रही हैं। शासन और मेला प्रशासन इस पर्व को भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने को प्रयासरत है।

इसी क्रम में श्री गंगा सभा, हरिद्वार की ओर से ‘श्री गंगा तिथि एवं पर्व निर्णय’ (गंगा पंचांग) में अर्धकुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियों की विधिवत घोषणा कर दी गई है।

इससे पहले संत समाज और मेला प्रशासन भी अर्धकुंभ के स्नान और अमृत (शाही) स्नान तिथियां जारी कर चुका है।

अर्धकुंभ 2027 के दृष्टिगत धर्मनगरी हरिद्वार सहित तीर्थ नगरी ऋषिकेश में अवस्थापना संबंधी कार्य गतिमान हैं। ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।

अर्धकुंभ पर्व का शुभारंभ 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के पावन स्नान से होगा। श्री गंगा सभा की ओर से जारी गंगा पंचांग विक्रमी संवत्सर 2083 के अनुसार तैयार किया गया है।

इसमें 20 मार्च 2026 से छह अप्रैल 2027 तक की विस्तृत ज्योतिषीय एवं धार्मिक जानकारी समाहित की गई है। पंचांग में वार, तिथि, नक्षत्र, राशि प्रवेश और सूर्योदय के साथ-साथ हरिद्वार के प्रमुख पर्व, व्रत एवं स्नान तिथियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

विशेष रूप से अर्धकुंभ के सभी प्रमुख स्नान पर्वों को इसमें स्थान दिया गया है। उत्तराखंड शासन और मेला प्रशासन अर्धकुंभ 2027 में कुल 10 प्रमुख स्नान पर्व आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जिनमें चार अमृत स्नान (शाही स्नान) प्रस्तावित हैं।

वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के चलते कुंभ का आयोजन सीमित अवधि में हुआ था, जिसके कारण इस बार अर्धकुंभ को भव्य रूप देने की रणनीति बनाई जा रही है।

प्रमुख स्नान तिथियां

  • 14 जनवरी 2027 - मकर संक्रांति
  • 6 फरवरी 2027 - मौनी अमावस्या
  • 11 फरवरी 2027 - बसंत पंचमी
  • 20 फरवरी 2027 - माघ पूर्णिमा

अमृत स्नान (शाही स्नान)

  • 6 मार्च 2027 - महाशिवरात्रि (प्रथम अमृत स्नान)
  • 8 मार्च 2027 - सोमवती/फाल्गुन अमावस्या (द्वितीय अमृत स्नान)
  • 14 अप्रैल 2027 - मेष संक्रांति/वैशाखी (तृतीय अमृत स्नान)
  • 20 अप्रैल 2027 - चैत्र पूर्णिमा (चतुर्थ अमृत स्नान)

अन्य प्रमुख पर्व

  • 7 अप्रैल 2027 - नव संवत्सर
  • 15 अप्रैल 2027 - राम नवमी

पंचांग में किया है अर्धकुंभ का उल्लेख

श्री गंगा सभा ने अपने पंचांग में अर्धकुंभ को अर्धकुंभ शब्द से ही इंगित किया है। भले ही मेला प्रशासन अर्धकुंभ 2027 को कुंभ कहकर संबोधित कर रहा है।

इसको लेकर तीर्थ पुरोहित और कुछ संत मिल प्रशासन और शासन पर सवाल भी उठा चुके हैं। श्री गंगा सभा हरिद्वार के अध्यक्ष पंडित नितिन गौतम ने कहा कि गंगा सभा अपनी स्थापना से लेकर हर वर्ष वार्षिक संवत्सर पंचांग जारी करती है।

जिसमें धार्मिक और ज्योतिष गणना को विस्तृत रूप से समाहित किया जाता है। इस संवत्सर का जो पंचांग जारी किया गया है, उसमें अर्धकुंभ के पर्व स्नान और अमृत का भी उल्लेख किया गया है। अर्धकुंभ में पहली बार सरकार अमृत स्नान भी कराने जा रही है।

दो दिन में दो अमृत स्नान, संत समाज में बढ़ी उलझन

महाशिवरात्रि (6 मार्च 2027) और सोमवती अमावस्या (8 मार्च 2027) के स्नान को लेकर संत समाज में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

परंपरा के अनुसार अर्धकुंभ और कुंभ का प्रारंभ महाशिवरात्रि से माना जाता है, इस दिन अखाड़ों के साधु-संत पूर्ण तैयारी के साथ अमृत स्नान करते हैं।

किंतु इसके ठीक अगले दिन सोमवती अमावस्या का स्नान निर्धारित होने से संतों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

परंपरागत रूप से महाशिवरात्रि के दिन प्रथम शाही स्नान होता है, जिसमें सभी अखाड़े भव्य पेशवाई के साथ गंगा स्नान करते हैं। यह पेशवाई की तैयारी के लिए पर्याप्त समय की जरूरत होती है।

ऐसे में अगले ही दिन सोमवती अमावस्या का स्नान निर्धारित होने से अखाड़ों को पुनः उसी स्तर की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा।

यही कारण है कि संत समाज के बीच इस तिथि को लेकर मंथन और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आने वाले समय में अखाड़ा परिषद और मेला प्रशासन के बीच समन्वय के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना संभव माना जा रहा है।

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