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    Ahoi Ashtami 2022: सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रहा है अहोई अष्टमी का व्रत, पढ़ें पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

    By Jagran NewsEdited By: Sunil Negi
    Updated: Fri, 14 Oct 2022 06:40 PM (IST)

    Ahoi Ashtami 2022 महिलाएं अहोई अष्टमी व्रत संतान की लंबी आयु और सुख- समृद्धि के लिए रखती हैं। यह व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद यानी 17 अक्‍टूबर को पड़ रहा है। करवाचौथ की तरह ही यह व्रत निर्जला रखा जाता है।

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    Ahoi Ashtami 2022 अहोई अष्टमी का व्रत 17 अक्टूबर को किया जाएगा।

    जागरण संवाददाता, रुड़की: Ahoi Ashtami 2022 अहोई अष्टमी का व्रत 17 अक्टूबर को किया जाएगा। इस वर्ष यह व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रहा है। इसके अलावा सोमवार का दिन और अष्टमी तिथि ये दोनों इस व्रत को खास बना रही हैं। अहोई अष्टमी व्रत महिलाएं अपने पुत्रों की दीर्घायु की कामना के लिए करती हैं।

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    अहोई अष्टमी का व्रत माता पार्वती को समर्पित

    आइआइटी रुड़की परिसर स्थित श्री सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत माता पार्वती को समर्पित है।

    अहोई अष्टमी व्रत में तारों का विशेष महत्व

    इस व्रत में माताएं निर्जल व्रत रखते हुए उदय होते तारों को देखकर व्रत का समापन करती हैं। जिस तरह करवाचौथ के व्रत में चंद्रमा का महत्व है, उसी तरह अहोई अष्टमी व्रत में तारों का विशेष महत्व होता है। अहोई अष्टमी का व्रत करने से पुत्रों के दीर्घायु और संतान कामना की भी पूर्ति होती है।

    अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

    उन्होंने बताया कि अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को छह बजकर दस मिनट से लेकर सात बजकर 25 मिनट के मध्य रहेगा। वहीं, तारों के उदय का समय शाम को छह बजकर 35 मिनट के बाद रहेगा। इसी समय व्रत का पारण किया जाएगा।

    व्रत में नियमों का करें पालन

    इस व्रत में कुछ ऐसे नियम भी हैं, जिनका व्रती महिलाओं को पालन करना चाहिए। ऐसा न करने से संतान को कष्ट प्राप्त होता है। इस दिन कैंची, सुई का प्रयोग नहीं करना चाहिए। भूमि की खोदाई करनी चाहिए और सब्जी नहीं काटनी चाहिए। साथ ही, दिन में शयन करने से भी परहेज करना चाहिए।

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    ऐसे रखें व्रत

    इस व्रत को रखने का नियम यह है कि दीवार पर गेरू से माता अहोई और उनके बच्चों का चित्र बनाएं। फिर उनकी पूजा करें। इसके बाद में अहोई माता की कथा सुननी चाहिए। इसके बाद सास और जेठानी को उपहार देते हुए उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए।

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