सुख-शांति व स्वस्थ रहने का संदेश दे रहा योग महोत्सव
जागरण संवाददाता ऋषिकेश तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में रविवार से 32वां अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव ऑनलाइन शुरू हो गया है।

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में रविवार से 32वां अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव ऑनलाइन शुरू हो गया है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि परमार्थ निकेतन पूरी दुनिया को योग सिखा रहा है। इससे लोग स्वस्थ हो रहे हैं और अध्यात्म से जुड़ रहे हैं। योग महोत्सव के माध्यम से मानवता को सुख-शांति और स्वस्थ रहने के संदेश दिया जा रहा है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि योग एवं आयुर्वेद कोविड-19 महामारी को मात देने में पूरी तरह सक्षम हैं। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कोविड के चलते देश-विदेश से आने वाले प्रतिभागियों की स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य कई तरह की समस्याओं को देखते हुए इस वर्ष उनके घरों तक योग को पहुंचाने के लिए ऑनलाइन योग महोत्सव का आयोजन हो रहा है। प्रतिभागी घरों में रहकर ही योग, ध्यान, सत्संग, मां गंगा एवं संतों का दर्शन-मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
योग महोत्सव की निदेशक डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती, योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती और देश-विदेश से जुड़े योगाचार्य व योग जिज्ञासुओं ने ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से महोत्सव के उद्घाटन सत्र में सहभाग किया। साध्वी भगवती सरस्वती ने बताया अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में सात से 14 मार्च तक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 150 से अधिक योग की कक्षाएं संचालित होंगी। योग महोत्सव में 25 देशों के 90 से अधिक विद्वान संत और योगाचार्य सहभाग कर रहें हैं। साथ ही कई देशों के योग जिज्ञासुओं ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुड़कर योग को आत्मसात करने के लिए पंजीयन करवाया है।
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विभिन्न योग कक्षाओं का होगा आयोजन
डॉ. भगवती सरस्वती ने बताया कि योग महोत्सव के दौरान एक सप्ताह तक ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से विश्व विख्यात योगाचार्य प्रमुख रूप से अष्टांग योग, अयंगार योग, हठ योग, राज योग, भक्ति योग, कर्मयोग, गंगा योग, विन्यास योग, कुंडलिनी योग, जीवमुक्ति योग, सितोह योग, सेमैटिक योग, लीला योग, डीप योग आदि प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा ध्यान, मुद्रा, वैदिक मंत्र, संस्कृत वाचन, आयुर्वेद, साउंड हीलिग, रेकी, दर्शन, आयुर्वेद, होम्योपैथी चिकित्सा, व्याख्यान, प्रवचन व सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा।
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