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    डाकपत्थर से यमुना दर्शन यात्रा शुरू, पांवटा हिमाचल में हुआ स्वागत

    By Sunil NegiEdited By:
    Updated: Sat, 28 Aug 2021 04:36 PM (IST)

    प्रसिद्ध विचारक केएन गोविंदाचार्य ने डाकपत्थर में यमुना आरती कर यमुना दर्शन यात्रा की शुरूआत की। विचारक गोविंदाचार्य ने कहा कि प्रकृति केंद्रित विकास की ही वर्तमान में जरूरत है। उन्होंने पांवटा साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेका। यात्रा के दौरान जनसंवाद किया जा रहा है।

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    हिमाचल के पांवटा साहिब में प्रसिद्ध विचारक गोविंदाचार्य का स्वागत करते स्थानीय लोग।

    जागरण संवाददाता, विकासनगर। प्रसिद्ध विचारक, चिंतक व राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक केएन गोविंदाचार्य ने डाकपत्थर में आरती कर यमुना दर्शन यात्रा की शुरूआत की। जगह जगह आपदा की वजह से यात्रा को उत्तराखंड के कई शहरों से होकर जाना था, लेकिन प्राकृतिक आपदा की वजह से जगह जगह रास्ते बंद होने की वजह से डाकपत्थर से चली यात्रा हिमाचल के पांवटा साहिब होते हुए वाया सहारनपुर होते हुए रवाना हुई।

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    शनिवार सुबह पूरे विधि विधान के साथ यम मंदिर डाकपत्थर में पूजा अर्चना व यमुना जी की आरती के साथ यात्रा शुरू की गई। यहां से यात्रा पांवटा साहिब के लिए प्रस्थान कर गई। हिमाचल के पांवटा साहिब से 30 अगस्त को आदिबद्री होते हुए सहारनपुर जाएगी।

    विचारक गोविंदाचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर शुरू होने वाली यमुना दर्शन यात्रा भगवान श्रीकृष्ण के कर्म क्षेत्र, उनकी प्रेमलीला भूमि के दर्शन और इस पूरे क्षेत्र के कण कण में रचे बसे उनके प्रेमरस में पूरी तरह से डूबने की यात्रा भी है। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक केएन गोविंदाचार्य ने कहा मान्यता है कि गंगा जी ज्ञान, श्री नर्मदा जी वैराग्य व यमुना जी प्रेम की नदी है। इस अर्थ में इन तीनों यात्राओं को देखें तो ज्ञान से प्रारंभ यह यात्रा वैराग्य से होते हुए प्रेम तक पहुंचने की यात्रा है। प्रसिद्ध चिंतक ने फिर दोहराया कि प्रकृति केंद्रित विकास की ही वर्तमान में जरूरत है। उन्होंने पांवटा साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेका। यात्रा के दौरान जगह जगह जनसंवाद किया।

    प्रसिद्ध विचारक ने दोहराया कि कहा कि प्रकृति केंद्रित विकास के लिए साहस व साधन भी है, केवल शासन व प्रशासन में बैठे हुए जिम्मेदारों को इस बात पर विश्वास कर उसी अनुसार योजनाएं बनानी हैं। आत्मनिर्भर भारत रामराज्य की अवधारणा पर खड़ा हो, इसमें सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं का क्या रोल हो सकता है, इसके लिए वे यमुना दर्शन व अध्ययन यात्रा पर निकले हैं। यात्रा 14 सितंबर को प्रयागराज में संपन्न होगी। शुभारंभ मौके व आरती के दौरान राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक पवन श्रीवास्तव, ब्रह्मचारी महेश देव स्वरूपानंद, आंदोलन के संगठन मंत्री बसवराज पाटिल, संजय शर्मा, जीवकांत झा आदि मौजूद रहे।

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