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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 21, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ट्रायल में ही उखड़ी लीलैंड बसों की वायरिंग, परिवहन निगम में मचा हड़कंप

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Fri, 21 Feb 2020 02:07 PM (IST)Updated: Fri, 21 Feb 2020 08:03 PM (IST)

हाल ही में जो 20 नई बसें अशोका लीलैंड से मिलीं वह भी ट्रायल में खराब हो गईं। दिल्ली रूट ...और पढ़ें

ट्रायल में ही उखड़ी लीलैंड बसों की वायरिंग, परिवहन निगम में मचा हड़कंप
ट्रायल में ही उखड़ी लीलैंड बसों की वायरिंग, परिवहन निगम में मचा हड़कंप

देहरादून, जेएनएन। राज्य परिवहन निगम में नई बसों की खरीद फिर सवालों में आ गई है। दो माह पहले टाटा कंपनी की बसों में आई खराबी का मामला अभी थमा भी नहीं था कि हाल ही में जो 20 नई बसें अशोका लीलैंड से मिलीं, वह भी ट्रायल में खराब हो गईं। दिल्ली रूट पर पहले ही दिन बसों की वायरिंग उखड़ गई। इससे परिवहन निगम में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में लीलैंड कंपनी के तकनीकी अधिकारी यहां पहुंचे और बसों को दुरुस्त किया। निगम के महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि लीलैंड की 20 बसें अभी ट्रायल पर चल रहीं। ट्रायल पूरा होने के बाद शेष 130 बसें मंगाई जाएंगी। 

बस बेड़े को बढ़ाने की कसरत में जुटे राज्य परिवहन निगम ने पिछले साल 300 नई बसों के आर्डर किए थे। इनमें टाटा को पर्वतीय मार्गों के लिए 150 छोटी बसें और मैदानी मार्गों के लिए अशोका लेलैंड कंपनी को 150 बड़ी बसों के ऑर्डर दिए थे। टाटा ने अक्टूबर में बसें भेज दी थीं, लेकिन यह बसें दोषपूर्ण निकली। बसों में पुराने मॉडल के लंबी रॉड वाले गियर लीवर थे, जो टूट रहे थे। इसके साथ ही दो बार बसें पहाड़ी मार्गों पर गियर लीवर टूट जाने से हादसे का शिकार होते-होते बचीं। इस पर गत नवंबर में रोडवेज प्रबंध निदेशक रणवीर चौहान ने टाटा की संचालित नई 130 बसों का मार्गों पर संचालन रोक दिया था। 

बीस बसों का पंजीकरण नहीं होने से ये कार्यशाला में ही खड़ी थीं। बसों की जांच सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट दिल्ली से कराई गई। 15 दिसंबर को दून में बसों की जांच के बाद सीआइआरटी ने इन्हें खतरनाक बताते हुए संचालन न करने की रिपोर्ट दी थी। इस पर बसें टाटा कंपनी को लौटा दी गईं। बसों को टाटा के पंतनगर प्लांट में ठीक किया जा रहा है। इस बीच गत 31 दिसंबर और एक जनवरी को सीआइआरटी टीम ने राजस्थान अलवर में पहुंचकर लीलैंड की बसों की भी जांच की। जांच के बाद सीआइआरटी की ओर से बसें पास कर दी गईं। 

रोडवेज द्वारा बसों की डिलीवरी को ग्रीन सिग्नल दे दिया गया, जिस पर गत 30 जनवरी को लीलैंड ने 20 बसें दून भेज दी थी। रोडवेज ने इन बसों को पंजीकरण के बाद विभिन्न डिपो में आवंटित कर दिया। इनमें पांच बसें देहरादून डिपो, पांच बसें ऋषिकेश डिपो और चार-चार बसें काशीपुर और रुद्रपुर डिपो को दीं, जबकि शेष दो बसें हल्द्वानी डिपो को मिलीं। सभी बसों का संचालन ट्रायल पर दिल्ली रूट पर कराया गया। चालकों को निर्देश दिए गए थे कि बसों में जो भी कमी आए, उसे नोट भी किया जाए। बताया गया कि बसों की पहले ही दिन मडगार्ड के ऊपर से गुजर रही पूरी वायरिंग उखड़ गई। वायरिंग को एक क्लीप के जरिए अटकाया गया था। क्लीप भी पूरी तरह टूट गए। 

वायरिंग उखड़ने से लाइटें हुईं बंद 

चलती बसों में वायरिंग उखड़ जाने से बसों की लाइटें बंद हो गईं। कुछ बसों के हॉर्न ने भी काम करना बंद कर दिया। इस दौरान चालकों को बसें वापस डिपो तक लाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। 

जांच प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल 

नई बसों की खरीद में रोडवेज की ओर से की जाने वाली तकनीकी जांच प्रक्रिया फिर सवालों में है। अशोका लिलैंड की बसों की जांच करने अलवर पहुंची सीआइआरटी और रोडवेज अधिकारियों की संयुक्त टीम ने बसें चेक कीं और फिर इन्हें पास किया। सूत्रों ने बताया कि उस वक्त भी यह बात पकड़ में आई थी कि वायरिंग होमडगार्ड के ऊपर होते हुए जा रही। इसके क्लीप उखड़ने का जिक्र भी हुआ, लेकिन फिर भी बसों को हरी झंडी दे दी गई। यही मामला टाटा के साथ हुआ था। वहां भी गोवा प्लांट में अधिकारियों ने बसों को निरीक्षण के बाद ओके कर दिया था, जबकि बसों में पुराने मॉडल के गियर लीवर थे। 

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टाटा की बसों को सीआरटी की मंजूरी 

टाटा कंपनी को वापस की गईं सभी बसों को दुरुस्त करने के बाद इनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया है। टाटा ने छोटे गियर लीवर लगाने और अन्य कमियों को दूर करने के बाद 20 बसें जनवरी में ट्रायल पर भेजी थीं। ये बसें ट्रायल में पास हो गईं। रोडवेज ने इनकी रिपोर्ट सीआइआरटी को भेजी थी। महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि बसों को सीआइआरटी ने हरी झंडी दे दी है। जो 130 बसें ठीक होने गई थी, उन्हें जल्द ही वापस ले लिया जाएगा। 

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