देहरादून, हरीश बिष्ट। शीतकाल के दौरान चमोली जिले में वन्य जीवों की सुरक्षा वन विभाग के लिए चुनौती बन जाती है। जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद तस्कर वन्य जीव बहुल इलाकों में डेरा डाल देते हैं। हैरत की बात है कि इस सबके बावजूद वन विभाग सिर्फ कैमरा ट्रैप के भरोसे वन्य जीवों की सुरक्षा के दावे कर रहा है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के चलते निचले इलाकों के प्रवास पर आए वन्य जीवों के जीवन पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। 

चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में कस्तूरा मृग, काला भालू, भूरा भालू, हिम तेंदुआ, रेड फॉक्स, भरल, घुरड़ आदि के अलावा लुप्तप्राय प्रजाति के कई वन्य जीवों का वास है। इन दिनों उच्च हिमालयी इलाकों में लगातार बर्फबारी के कारण वन्य जीव ठंड से बचने को अपने प्राकृतिक वास छोड़ निचले इलाकों का रुख कर रहे हैं। तस्कर इसी ताक में रहते हैं कि वन्य जीव कब निचले इलाकों में आएं और वह उनका शिकार करें। खासकर नेपाली मूल के वन्य जीव तस्करों की सक्रियता इन दिनों चमोली जिले में देखी जा रही है। ये तस्कर कस्तूरी मृग और गुलदार की खाल समेत अन्य जानवरों के अंगों की तस्करी करते हैं। 

वन विभाग की ओर से शीतकाल में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए जंगलों में कैमरा ट्रैप से निगरानी रखने की बात की जा रही है। लेकिन, आज तक एक भी वन्य जीव तस्कर इन कैमरों में कैद नहीं हुआ। कारण, तस्कर भली-भांति जानते हैं कि कैसे उन्हें कैमरों की जद में आने से बचना है। हां! यह जरूर है कि इन कैमरा ट्रैप में दुर्लभ वन्य जीवों की तस्वीरें अक्सर कैद होती रही हैं। 

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नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के एसडीओ टीएस शाही कहते हैं कि शीतकाल में अधिकतर वन क्षेत्र बर्फ से आच्छादित रहता है। ऐसे में जंगलों में जाना भी मुश्किल होता है। इसलिए वन्य जीवों की सुरक्षा को कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इसके अलावा विभाग लंबी दूरी की गश्त की रणनीति भी बना रहा है। कहा कि वन्य जीव तस्करों से निपटने के लिए वन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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