देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड के वन्यजीव अंतर्राष्ट्रीय माफिया के निशाने पर हैं। यहां से पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा तक वन्यजीवों के अंगों का व्यापार हो रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व के दूधिया ब्लॉक में पिछले वर्ष हुई बाघ के मांस और गुलदार की खाल बरामदगी प्रकरण की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

जांच अधिकारी रहे मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने बुधवार को 436 पेज की यह रिपोर्ट मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक कार्यालय को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक इसमें खुलासा हुआ है कि बाघ का शिकार उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की सीमा में उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में हुआ था, जबकि गुलदार का शिकार राजाजी रिजर्व से लगे क्षेत्र में किया गया। रिपोर्ट में 14 शिकारियों के नामों का खुलासा गया है। 

इसके अलावा वन विभाग के 11 कर्मिकों को भी लापरवाही, साक्ष्यों से छेड़छाड़, गलत बयानी आदि का दोषी ठहराया गया है। राजाजी रिजर्व के दूधिया ब्लॉक में वन मुख्यालय की टीम ने पिछले वर्ष मार्च में छापा मारकर गुलदार की खाल और कुछ मांस बरामद किया था। तब रिजर्व प्रशासन व वन मुख्यालय के बीच तलवारें खिंची थीं। यही नहीं, बार-बार जांच अधिकारी बदलने को लेकर भी यह प्रकरण सुर्खियों में रहा था। इस बीच दिसंबर में मामले की जांच कर रहे मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन से जांच हटा दी गई थी। तब वह अवकाश पर थे। वापस लौटने के बाद अब उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट फाइनल कर बुधवार को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक कार्यालय को सौंप दी।

सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार विवेचना में कई वन्यजीवों के शिकार और व्यापार की पुष्टि हुई है, जिसके पीछे एक बड़ा सर्वधार्मिक गिरोह सक्रिय है और इसके तार मध्य पूर्वी देशों से लेकर दक्षिण पूर्वी देशों तक फैले हैं। ताजा मामले की विवेचना का जिक्र करते हुए बताया गया है कि बाघ का शिकार उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की सीमा पर कोटावाली क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के इलाके में किया गया।

जिन लोगों ने यह बाघ मारा, उनके तार राजस्थान के चुरू से लेकर मेघालय के शिलांग के व्यक्तियों से जुड़े हैं और बाघ की खाल व अंगों को वहां तक पहुंचाया गया। साथ ही वन्यजीव अंगों का व्यापार पाकिस्तान व बांग्लादेश सीमा तक किए जाने की पुष्टि हुई है। सूत्रों ने बताया कि जिस गुलदार की खाल मिली, उसे राजाजी से लगे गुलदार प्रभावित ठाकुरपुर नेपाली फार्म से लेकर हरिपुरकलां तक के क्षेत्र में मारा गया। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में उल्लेख है कि विवेचना में 14 शिकारियों के नाम सामने आए हैं, जो वन्यजीव अपराध के दोषी पाए गए हैं।

यही नहीं, वन विभाग के 11 कार्मिकों को प्रकरण में लापरवाही, प्रेरणा, साक्ष्यों से छेड़छाड़, गलत बयानी का दोषी ठहराया गया है। इन सभी के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही के लिए किसी सक्षम अधिकारी को अधिकृत करने की सिफारिश की गई है। उधर, संपर्क करने पर मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन ने रिपोर्ट सौंपे जाने की पुष्टि की, मगर इसमें उल्लिखित बिंदुओं का खुलासा करने से इनकार कर दिया।

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