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    Waste Management Crisis: पूरे राज्य से चार गुना ऊंचा अकेले दून-हरिद्वार में कूड़े का पहाड़, अल्मोड़ा की हालत और खराब

    उत्तराखंड में कचरे के पहाड़ बढ़ते जा रहे हैं जिससे एनजीटी और स्वच्छ भारत मिशन चिंतित हैं। राज्य में 16 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा कचरा जमा है जिसमें से केवल 27% का ही निस्तारण हुआ है। देहरादून और हरिद्वार में सबसे ज़्यादा कचरा है जबकि अल्मोड़ा में निस्तारण शुरू भी नहीं हुआ है। कचरे से पर्यावरण और स्वास्थ्य को कई तरह के नुकसान हो रहे हैं।

    By Jagran News Edited By: Vivek Shukla Updated: Fri, 29 Aug 2025 09:45 AM (IST)
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    देहरादून के शीशमबाड़ा प्लांट में एकत्र अनिस्तारित कचरा। जागरण आर्काइव

    अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। देवभूमि में ऊंचे होते जा रहे कूड़े के पहाड़ों ने एनजीटी व स्वच्छ भारत मिशन की नींद उड़ा दी है। प्रदेश में 50 से अधिक डंपसाइटों पर 16 लाख मीट्रिक टन से अधिक अनिस्तारित अपशिष्ट (लीगेसी वेस्ट) का ढेर लग गया है।

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    राज्य में कूड़े के पहाड़ का महज 27 प्रतिशत हिस्सा ही निस्तारित किया जा सका है। सबसे बड़ी फिक्र देहरादून व हरिद्वार को लेकर है, जहां पूरे राज्य के कुल अनिस्तारित कचरे से चार गुना ऊंचा कूड़े का पहाड़ आसमान छू रहा है। कुमाऊं में अल्मोड़ा की स्थिति सबसे बदतर है।

    पहाड़ों पर बढ़ते कचरे की गति से उसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। दून व हरिद्वार शहर में राज्य की कुल जनसंख्या का करीब 11 फीसदी हिस्सा रहता है, लेकिन राज्य के कुल अनिस्तारित कचरे का 81 प्रतिशत हिस्सा अकेले दून व हरिद्वार से निकलकर कूड़े का पहाड़ बना रहा है। कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में अब तक पुराने कचरे के निस्तारण को शुरू ही नहीं किया गया है। यहां शत प्रतिशत पुराना कचरा कूड़े के पहाड़ में तब्दील होकर खतरा बन रहा है।

    चमोली, रुद्रप्रयाग व यूएस नगर का काम बेहतर

    पहाड़ के कुछ जिले बेहतर काम भी कर रहे हैं। शहरी विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार चमोली में 90 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग में 100 प्रतिशत, यूएस नगर में 93 प्रतिशत व नैनीताल में 61 प्रतिशत लीगेसी वेस्ट का निस्तारण कर दिया गया है।

    • कुल लीगेसी कचरा साइट -- 50
    • कुल लीगेसी कचरा - 22.85 लाख मीट्रिक टन
    • निस्तारित पुराना कचरा- 6.17 लाख मीट्रिक टन
    • शेष अनिस्तारित कचरा- 16.68 लाख मीट्रिक टन

    डंपसाइटों पर अवशेष अनिस्तारित कचरा 

    • देहरादून- 714418
    • हरिद्वार- 330586
    • टिहरी- 14308
    • अल्मोड़ा -21636
    • बागेश्वर - 20650
    • चंपावत- 26608
    • नैनीताल-79500
    • पिथौरागढ़- 39508
    • नोट- यह अनिस्तारित कचरा मीट्रिक टन में है।

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    पर्यावरण व मनुष्य को नुकसान

    • ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन
    • वन्यजीवों को नुकसान
    • मनुष्यों में श्वसन संबंधी समस्याएं
    • कीटों व कृमियों से बीमारियों का प्रसार
    • कचरे से निकलने वाली मीथेन व कार्बन डाइआक्साइड से जलवायु को नुकसान
    • लीचेट में मौजूद अमोनिया झीलों व नदियों का आक्सीजन समाप्त कर जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा रही

    नगर निकायों को बजट आवंटन कर अनिस्तारित कचरे को निस्तारित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, साल के अंत तक कचरे के पहाड़ का काफी हिस्सा निस्तारित हाे जाएगा।  - गौरव कुमार, अपर सचिव, शहरी विकास