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    चाय वाले का बेटा बनेगा कैमिकल इंजीनियर, जानि‍ए उनके हौसले की कहानी

    By Edited By:
    Updated: Thu, 04 Jul 2019 04:29 PM (IST)

    ऋषिकेश में एक चाय बेचने वाले के बेटे ने जेईई परीक्षा पास कर देश के प्रतिष्ठित संस्थान आइआइटी दिल्ली में कैमिकल इंजीनियरिंग में दाखिला पाया है।

    चाय वाले का बेटा बनेगा कैमिकल इंजीनियर, जानि‍ए उनके हौसले की कहानी

    ऋषिकेश, जेएनएन। परिंदों को नहीं दी जाती तालिम उड़ान की वे खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमान की, रखता है जो हौसला आसमान छूने का उसको नहीं होती परवाह गिर जाने की। यह पंक्तियां ऋषिकेश के व्योम गुप्ता पर सटीक बैठती हैं। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद व्योम गुप्ता ने जेईई परीक्षा पास कर देश के प्रतिष्ठित संस्थान आइआइटी दिल्ली में कैमिकल इंजीनियरिंग में दाखिला पाया है। 

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    होनहार व्योम ने बचपन से ही अपना लक्ष्य अटल और निश्चय दृढ़ कर दिया था। यही वजह रही कि परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति कभी व्योम के आगे बाधा नहीं बन पाई। पिछले डेढ़ दशक से रेलवे रोड पर सड़क किनारे चाय की ठेली लगाने वाले संजय गुप्ता का सीना आज बेटे व्योम की उपलब्धि पर चौड़ा हो गया। हो भी क्यों नहीं आखिर एक चाय वाले के बेटे ने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आइआइटी में अपनी कठिन लगन और परिश्रम के बूते प्रवेश जो पाया है। दो भाइयों में सबसे बड़े व्योम गुप्ता पढ़ाई में बचपन से ही होशियार रहे। हाईस्कूल परीक्षा में व्योम ने 94 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ऋषिकेश पब्लिक स्कूल में टॉप कर अपने बुलंद होंसले का परिचय दे दिया था। वर्ष 2018 में व्योम इंटरमीडिएट परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सिटी टॉपर बने थे। व्योम को चयन गत वर्ष ही इंजीनियरिंग के लिए एनआइटी जयपुर में हो गया था, उन्होंने यहां इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश भी ले लिया था। मगर, व्योम की मंजिल तो कुछ और ही थी। व्योम गुप्ता ने आइआइटी के लिए अपनी तैयार जारी रखी। इस वर्ष व्योम ने जेईई एडवांस में 2045 रैंक व मेंस में 4642 रैंक हासिल कर आखिर आइआइटी में प्रवेश पा ही लिया। व्योम ने आइआइटी दिल्ली में कैमिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया है। तीन जुलाई को व्योम दिल्ली के लिए रवाना होंगे। 

    व्योम ने बताया कि ऋषिकेश पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य एसएस भंडारी व अन्य शिक्षकों ने हमेशा उनका मार्गदर्शन किया। पिता संजय गुप्ता और मां आरती गुप्ता ने उन्हें हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और उन्हें कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी। व्योम ने बताया कि उन्होंने प्रतिदिन छह से आठ घंटे का समय अपनी पढ़ाई को दिया। बड़ी बात यह है कि व्योम ने आज तक कभी कोचिंग नहीं ली। व्योम ने बताया कि उन्होंने सेल्फ स्टडी से ही तैयारी की। ऑनलाइन पाठ्यक्रम से उन्हें काफी मदद मिली। व्योम की इस कामयाबी पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। आरपीएस के प्रधानाचार्य एसएस भंडारी ने उन्हें शुभाकामनाएं दी।  

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