देहरादून, [जेएनएन]: गंगा नदी के वेग में 60 फीसद तक कमी आई है। कुछ दशकों पहले गंगा का जो बहाव था, वह अब आधा भी नहीं रह गया है। यह बात निदेशक वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) डॉ. सविता ने राजभवन में चल रहे टॉपर्स कॉन्क्लेव में कही। उन्होंने टॉपर्स छात्र-छात्राओं को बुधवार को संबोधित किया। कहा कि गंगा में पाए जाने वाले कछुए की कई प्रजातियां तेजी से विलुप्त होती जा रहा हैं। जिससे गंगा में कूड़े (गारवेज) की मात्रा बढ़ रही है और गंगा प्रदूषित हो रही है। गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में कछुए की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने गंगा के जीवनदान के लिए एफआरआइ की ओर से तैयार की गई डीपीआर की जानकारी दी। बताया कि 1982 में गंगा में लगभग पांच हजार डॉल्फिन थीं, जिनकी संख्या अब घटकर मात्र 1800 रह गई हैं। डॉल्फिन बाहुल्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी से कुछ आगे का है। गंगा के जीवनदान के लिए नदी के दोनों किनारों पर दो से पांच किलोमीटर वनीकरण करना होगा।

उन्होंने बताया कि गंगा के 2525 किलोमीटर लंबे किनारों में छोटे-बड़े 172 शहर हैं। डॉ. सविता ने बताया कि योजना में नदी के दोनों ओर सिर्फ वनीकरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि औषधीय गुणवत्तायुक्त पौधे लगाए जाएंगे। इससे नदी के औषधीय गुणों में वृद्धि होगी। इस प्रोजेक्ट में 41 प्लान्टेशन मॉडल प्रयोग किए जाएंगे। इसके तहत चार करोड़ 10 हजार पौधे लगाने की योजना है।

सफलता को बेहतर प्रदर्शन जरूरी टॉपर्स कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में कुलपति कुमाऊं विवि प्रो. डीके नौरियाल ने छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए उच्च प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। व्यावसायिक सफलता प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति में प्रेरणा, पॉजीटिव एटीट्यूड, अच्छा संचार कौशल, दूरदर्शिता, जोखिम लेने का हौसला और टीम बिल्डिंग जैसी विशेषताएं होनी जरूरी है। प्रो. नौरियाल ने कहा कि नकारात्मक सोच को भी अपने पक्ष में ले जाकर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आप अपनी चिन्ता और विकलता को अपनी सफलता का रास्ता बना सकते हैं। 

'विज्ञानधाम' से रूबरू हुए टॉपर्स द्वितीय सत्र में टॉपर्स छात्रों को देहरादून के झाझरा स्थित 'विज्ञानधाम' की सैर कराई गई। विज्ञान धाम में विद्यार्थियों ने प्लैनेटोरियम, हिमालय पर आधारित म्यूजियम और नक्षत्र वाटिका आदि का अवलोकन किया।

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