विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तराखंड में भूकंप निगरानी के लिए बनेंगी 8 नई वेधशालाएं, आपदा प्रबंधन होगा मजबूत

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:59 PM (IST)

भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में अब 8 नई भूकंप विज्ञान वेधशालाएं स्थापित की जाएंगी। इनसे कम तीव्रता वाले ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. उत्तराखंड में 8 नई भूकंप विज्ञान वेधशालाएं बनेंगी।

  2. कम तीव्रता वाले भूकंपों का आसानी से पता चलेगा।

  3. आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में अब धरती के भीतर होने वाली हलचल पर पैनी नजर रखी जा सकेगी। केंद्र सरकार देशभर में भूकंप निगरानी तंत्र की मजबूती को 100 नई भूकंप विज्ञान वेधशालाएं स्थापित करने जा रही है।

इनमें आठ वेधशालाएं उत्तराखंड में बनाई जाएंगी। इनके स्थापित होने पर प्रदेश में कम तीव्रता वाले भूकंप का भी पता लगने के साथ ही आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी। राज्य की ओर से आठ स्थलों का चयन कर इस संबंध में प्रस्ताव राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेज दिया गया है।

हिमालयी क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड में लगातार होती भूगर्भीय हलचलों के कारण कम तीव्रता के भूकंप लगातार आते रहते हैं। पिछले वर्ष 14 अक्टूबर से अब तक के कालखंड में यहां 55 बार धरती डोल चुकी है। रिक्टर पैमाने पर इन भूकंप का परिमाण 2.2 से 4.9 था।

ऐसे में समझा जा सकता है कि भूकंप के लिहाज से प्रदेश कितना संवेदनशील है। यहां के पर्वतीय जिलों में दुर्गम भूगोल, ऊंची ढलानों, भूस्खलन की आशंका और कई जगह सीमित सड़क संपर्क के कारण भूकंप के बाद राहत-बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण होते हैं।

इस परिदृश्य में भूकंप निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। भूकंप वेधशालाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। केंद्र का भी इस पर जोर है और प्रदेश के हिस्से में आठ वेधशालाएं आई हैं।

आठ जिलों में सशक्त होगा निगरानी तंत्र

प्रदेश में वेधशालाओं के लिए ऐसे स्थल चयनित किए गए हैं, जिससे आठ जिलों में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी को बेहतर बनाया जा सकेगा। इनमें रुड़की (हरिद्वार), रामनगर (नैनीताल), देवप्रयाग (टिहरी), कर्णप्रयाग (चमोली), केदारनाथ (रुद्रप्रयाग), चकराता (देहरादून), बागेश्वर व अल्मोड़ा शामिल हैं।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार इन वेधशालाओं का उद्देश्य कम तीव्रता वाले भूकंपों का पता लगाने की क्षमता बढ़ाना और संबंधित सूचनाओं को जल्द प्रसारित करना है। इससे आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों और अन्य संबंधित संस्थाओं को भूकंपीय गतिविधियों के आकलन में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में मौसम ने बदली करवट, देहरादून समेत कई स्थानों पर तेज बारिश, पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी

यह भी पढ़ें- राहुल गांधी के बयान पर भाजपा का विरोध, देहरादून में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कार्यकर्ताओं के साथ फूंका पुतला