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    सरकारी सरचार्ज न मिलने से UPCL को करोड़ों का घाटा, विद्युत टैरिफ पर पुनर्विचार की गुहार

    Updated: Sun, 06 Jul 2025 02:46 PM (IST)

    हल्द्वानी में सरकारी विभागों द्वारा सरचार्ज का भुगतान न करने से ऊर्जा निगम को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। निगम ने विद्युत टैरिफ में वृद्धि की मांग की है और नियामक आयोग को पुनर्विचार प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है। आयोग ने अप्रैल 2025 से केवल 5.62 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी थी जबकि निगम ने 29.23 प्रतिशत की मांग की थी।

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    नियामक आयोग को टैरिफ पर पुनर्विचार का प्रस्ताव भेजने की कसरत तेज. Concept Photo

    जागरण संवाददाता, देहरादून। सरकारी संस्थाओं से सरचार्ज का भुगतान न होने से ऊर्जा निगम करोड़ों का नुकसान होने का दावा कर रहा है। जिसकी भरपाई के लिए विद्युत टैरिफ में वृद्धि की मांग की जा रही है। ऐसे में ऊर्जा निगम की ओर से पुनर्विचार प्रस्ताव आयोग को भेजने की तैयारी है।

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    इसके लिए बोर्ड बैठक में भी सहमति जताते हुए प्रस्ताव को आडिट कमेटी के समक्ष रखने को कहा गया है। जहां से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव आयोग को भेजा जाएगा। बीते अप्रैल में जारी विद्युत टैरिफ में वांछित वृद्धि अनुमादित नहीं की गई थी।

    उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) की ओर से वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित टैरिफ में भारी कटौती से ऊर्जा निगम वित्तीय भार बढ़ने की बात कह रहा है। अब निगम पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव को पहले आडिट कमेटी में रखा जाएगा, फिर बोर्ड बैठक में अनुमोदन लेकर आयोग के समक्ष संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा।

    आयोग ने अप्रैल 2025 से केवल 5.62 प्रतिशत की विद्युत दर वृद्धि को मंजूरी दी थी, जबकि यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल ने 29.23 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव दिया था। ऊर्जा निगम का तर्क है कि राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2023 से पेयजल निगम, जल संस्थान व स्ट्रीट लाइटों पर बिजली के सरचार्ज का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

    ऐसे में निगम को करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए टैरिफ में अपेक्षित वृद्धि जरूरी बताई जा रही है। इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रस्ताव को आडिट कमेटी में रखने के निर्देश दिए हैं, जहां से स्वीकृति मिलने पर इसे ऊर्जा निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद नियामक आयोग से पुनर्विचार याचिका के माध्यम से संशोधित दरें लागू करने की मांग की जाएगी।