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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Uttarakhand News : घूसखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई, राज्य कर अधिकारी अनिल कुमार बर्खास्त

By Suman semwalEdited By: Nirmala Bohra
Published: Mon, 10 Oct 2022 02:15 PM (IST)

Uttarakhand News साल 2020 में राज्य माल और सेवा कर विभाग (स्टेट जीएसटी) में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया ...और पढ़ें

Uttarakhand News : राज्य कर अधिकारी अनिल कुमार बर्खास्त।
Uttarakhand News : राज्य कर अधिकारी अनिल कुमार बर्खास्त।

टीम जागरण, देहरादून : Uttarakhand News : घूसखोरी के मामले में राज्य कर आयुक्त ने की बड़ी कार्रवाई की है। राज्य कर अधिकारी अनिल कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद विजिलेंस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया था। वह पहले भी गिरफ्तार हुए थे, लेकिन जमानत पर रिहाई के बाद दोबारा सेवाएं दे रहे थे।

साल 2020 में राज्य माल और सेवा कर विभाग (स्टेट जीएसटी) में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया था। देहरादून के आशारोड़ी चेकपोस्ट (मोबाइल दस्ता) पर तैनात एक अधिकारी पर एक मालवाहक को रुकवाकर जबरन वसूली करने का आरोप लगा था। अधिकारी ने एक खाते में भी 20 हजार रुपये की रकम भी डलवाई थी। माल मंगाने वाले हनुमान चौक के कारोबारी ने इस मामले में सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।

सीएम पोर्टल पर हनुमान चौक के व्यापारी अनिल माटा की ओर से दर्ज शिकायत में लिखा था कि 15 फरवरी को उन्होंने हिसार से अस्पतालों में कूड़े में प्रयुक्त होने वाले थैले मंगाए थे। उनका मालवाहक वाहन (एचआर 39सी 7088) देर रात आशारोड़ी चेकपोस्ट पर पहुंचा, तो वहां तैनात एक अधिकारी ने वाहन को रुकवा दिया।

माल ई-वे बिल पर मंगाया जा रहा था। हालांकि, तय समय (रात एक बजकर 30 मिनट) तक ई-वे बिल का पार्ट-बी फाइल नहीं था। माल भेजने वाले कारोबारी ने तड़के तीन बजे के आसपास इसे भी अपडेट कर दिया।

आरोप है कि इसके बाद भी संबंधित अधिकारी ने वाहन नहीं छोड़ा था और वाहन चालक की जेब से जबरन 9500 रुपये निकाल लिए थे। साथ ही और पैसे की मांग की गई थी। चालक ने माल भेजने वाले कारोबारी को फोन कर पूरी स्थिति बताई थी और माल भेजने वाले कारोबारी से भी अधिकारी की बात कराई थी।

कारोबारी ने जब यह कहा कि चालक के पास और पैसे नहीं हैं तो अधिकारी ने एक बैंक अकाउंट नंबर दे दिया था। कारोबारी ने अकाउंट नंबर परगूगल-पे से 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। तब जाकर अधिकारी ने वाहन को आगे जाने दिया था।