राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में एक अक्टूबर से प्रारंभ होने जा रही धान खरीद के लिए 11.63 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। मझोले और महिला कृषकों को खरीद केंद्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी। धान की बिक्री के लिए उन्हें इंतजार नहीं कराया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने धान खरीद नीति जारी कर दी। एक अक्टूबर से 15 जनवरी तक किसानों से धान की खरीद होगी। इसमें राज्य के किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। 20 अक्टूबर तक सिर्फ राज्य के किसानों से खरीद को वरीयता देने के निर्देश खाद्य सचिव बीएस मनराल ने दिए हैं। 20 अक्टूबर के बाद राज्य के सीमावर्ती जिलों से किसानों से खरीद के बारे में निर्णय लेने का अधिकार संबंधित जिलाधिकारी को दिया गया है।

डीएम बढ़ा-घटा सकेंगे खरीद केंद्र

खरीद के लिए पूरे प्रदेश में 247 केंद्र बनाए गए हैं। जिलों में केंद्रों की संख्या जिलाधिकारी किसानों की सहूलियत के हिसाब से बढ़ा या घटा सकते हैं। खरीद केंद्रों का संचालन चार संस्थाओं को दिया गया है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग व नेफेड और एनसीसीएफ ने खरीद केंद्र बनाए हैं। राज्य सरकार ने कामन धान के लिए 1940 रुपये प्रति क्विंटल और ए ग्रेड धान के लिए 1960 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है।

कच्चा आढ़तियों से भी होगी खरीद

कच्चा आढ़तियों के माध्यम से भी धान खरीद की जाएगी। किसानों को खरीदे गए धान के मूल्य के भुगतान में परेशानी नहीं होने दी जाएगी। 48 घंटे के भीतर उनके खातों में धनराशि जमा की जाएगी। भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया जाएगा। किसानों के पंजीकरण के लिए एक सितंबर से पोर्टल प्रारंभ किया जा चुका है।

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62 हजार किसान पंजीकृत

राज्य में 62 हजार किसान पंजीकृत हैं। पोर्टल पर ही किसानों के बैंक खाते और दूरभाष नंबरों को अपडेट कराने का विकल्प रखा गया है। खरीद केंद्रों पर 15 क्विंटल तक उत्पादन क्षमता वाले मझोले किसानों से प्राथमिकता से धान की खरीद की जाएगी। उन्हें और महिला किसानों को खरीद केंद्रों पर परेशान नहीं होने देने के निर्देश हैं।

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Edited By: Raksha Panthri