राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के 9225 राशन विक्रेताओं को जल्द तोहफा मिल सकता है। सरकार राज्य खाद्य योजना का लाभांश 18 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये करने की तैयारी में है। खाद्य मंत्री बंशीधर भगत के निर्देश पर विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर शासन में मंथन चल रहा है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर बढ़े हुए लाभांश के भुगतान के लिए सरकार को तकरीबन चार करोड़ की राशि अतिरिक्त वहन करनी होगी।

अभी सरकारी खाद्यान्न वितरण के एवज में मिलने वाले लाभांश की व्यवस्था में विसंगति है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले सस्ते खाद्यान्न में राशन विक्रेताओं को प्रति कुंतल 143 रुपये लाभांश का भुगतान किया जा रहा है। वहीं गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वालों यानी एपीएल उपभोक्ताओं के लिए लागू राज्य खाद्य योजना में उन्हें प्रति कुंतल महज 18 रुपये लाभांश मिल रहा है। खाद्यान्न का वजन, उठान और वितरण के लिए एक जैसी व्यवस्था के बावजूद राज्य खाद्य योजना में कम लाभांश देने का राशन विक्रेता विरोध कर रहे हैं।

राज्य खाद्य योजना में 83620 कुंतल खाद्यान्न

राज्य खाद्य योजना के तहत प्रति राशनकार्डधारक को पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल का वितरण किया जाता है। इस योजना के तहत प्रदेशभर में राशन विक्रेताओं को 55,700 कुंतल गेहूं और 27,920 कुंतल चावल का उठान करना पड़ता है। वहीं चीनी के लिए भी प्रति कुंतल महज सात रुपये दिए जा रहे हैं। इस लाभांश में 1963 के बाद बदलाव नहीं हुआ है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की तुलना में बेहद कम लाभांश के मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। खाद्य मंत्री बंशीधर भगत ने राशन विक्रेताओं को भरोसा बंधाया है कि यह नाइंसाफी को काफी हद तक खत्म किया जाएगा।

वित्त में प्रस्ताव विचाराधीन

उनके निर्देश पर खाद्य विभाग ने राज्य खाद्य योजना के तहत प्रति कुंतल लाभांश 50 रुपये देने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस प्रस्ताव पर शासन स्तर पर मंथन किया जा रहा है। वित्त विभाग में प्रस्ताव विचाराधीन है। खाद्य मंत्री बंशीधर भगत का कहना है कि राशन विक्रेताओं को बढ़ा हुआ लाभांश देने पर जल्द फैसला लिया जाएगा। इस संबंध में कवायद चल रही है। इस पर सालाना करीब चार करोड़ तक अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा।

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Edited By: Raksha Panthri