उत्तराखंड में SIR से महिला मतदाताओं की संख्या में आधा फीसद की गिरावट, चुनावी समीकरण पर असर
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद महिला मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2022 की ...और पढ़ें

फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद महिला मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2022 की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं की तुलना में तकरीबन 0.35 प्रतिशत कम हुई है।
वर्ष 2022 में कुल मतदाताओं में से 48.12 प्रतिशत महिला मतदाता थीं, वहीं वर्ष 2026 की मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 47.77 प्रतिशत रह गई है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में महिला मतदाता अहम भूमिका में थीं।
इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश की छह विधानसभा सीटों केदारनाथ, रुद्रप्रयाग, धारचूला, डीडीहाट, पिथौरागढ़ व द्वारहाट में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक थीं। पर्वतीय क्षेत्रों में पुरुष अधिकांश नौकरी के लिए घरों से बाहर रहते हैं।
ऐसे में महिला मतदाता यहां हर सीट पर किसी भी प्रत्याशी के जीत हार का फैसला करती रही हैं। यही कारण भी है कि चुनावों में राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
इस बार तस्वीर थोड़ी बदली है। इस समय प्रदेश में कोई भी विधानसभा सीट ऐसी नहीं है, जहां महिला मतदाता पुरुष मतदाताओं से अधिक हों। उलट यहां इनकी संख्या में कमी आई है। वर्ष 2022 में राज्य में कुल 3932995 महिला मतदाता थीं, अब यह संख्या घट कर 3421036 रह गई है।
डीएसी, पीएसी में कटे 160 मतदाता
प्रदेश में डुप्लीकेट सिमिलर एंट्री (डीएसी) व फोटो सिमिलर एंट्री (पीएसी) में 160 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ये ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की मतदाता सूची में शामिल थे।
एसआइआर से पहले घटे 4.5 लाख मतदाता
उत्तराखंड में एसआइआर से पहले ही 4.53 लाख मतदाता घट गए थे। एक जनवरी 2025 को प्रदेश में कुल मतदाता 84.29 लाख थे, जो कि एसआइआर शुरू होने से पहले 79.76 लाख रह गए थे। मृत्यु, विस्थापन, डुप्लीकेसी, अनुपस्थिति के कारण पूरी प्रक्रिया के बाद इन मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।
